Meta Connect 2026: कल्पना कीजिए कि आपको AI से कोई काम करवाना है और इसके लिए न फोन निकालना पड़े, न कोई ऐप खोलना पड़े. बस जेब में रखा एक छोटा डिवाइस टैप किया और AI से बातचीत शुरू. Meta इसी दिशा में आगे बढ़ रही है. Meta Connect 2026 में कंपनी ने Muse Charm नाम का एक छोटा AI डिवाइस दिखाया है, जिसे जेब में रखा जा सकता है या चाबी के गुच्छे के साथ लगाया जा सकता है. इसका मकसद Meta के Muse AI एजेंट तक बिना फोन खोले आसान पहुंच देना है.
टैप करते ही शुरू होगी AI से बातचीत
Muse Charm को एक छोटे AI रिमोट की तरह समझा जा सकता है. Meta के मुताबिक, इसमें Muse AI और उसका रियल-टाइम वॉयस सिस्टम दिया गया है. डिवाइस में एक छोटी स्क्रीन भी है, जिस पर Muse का डिजिटल अवतार दिखाई देता है. इसे टैप करके यूजर AI से बातचीत शुरू कर सकता है. यानी हर बार फोन अनलॉक करने या कोई ऐप खोलने की जरूरत नहीं होगी. इस डिवाइस के पीछे Meta का Muse AI एजेंट है, जिसे कंपनी ने सितंबर की शुरुआत में पेश किया था. यह सामान्य चैटबॉट से अलग तरीके से डिजिटल काम करने के लिए बनाया गया है. Meta के मुताबिक, Muse ईमेल भेजने, यात्रा की योजना बनाने, वेबसाइट पर काम करने और फॉर्म भरने जैसे काम कर सकता है.
सिर्फ जवाब नहीं, आपके लिए काम करेगा Muse
Meta का कहना है कि Muse किसी बड़े काम को छोटे-छोटे चरणों में बांटकर उस पर काम कर सकता है. लंबे कामों के दौरान ऐप बंद होने के बाद भी यह काम जारी रख सकता है और संवेदनशील काम करने से पहले यूज की अनुमति मांग सकता है. कंपनी ने इसके लिए Secure VM भी तैयार किया है. Meta के अनुसार, इसमें AI और यूजर का डेटा अलग वर्चुअल कंप्यूटर में रखा जाता है. ईमेल भेजने या खरीदारी जैसे संवेदनशील कामों से पहले यूजर की मंजूरी जरूरी होगी.
अभी प्रोटोटाइप, कीमत का खुलासा नहीं
Muse Charm अभी बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है. Meta ने Connect 2026 में इसका प्रोटोटाइप दिखाया है और कहा है कि इसके बारे में ज्यादा जानकारी इस साल बाद में दी जाएगी. कंपनी इसे दिसंबर के छुट्टियों के मौसम तक उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है, लेकिन इसकी कीमत, बैटरी और पूरी तकनीकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. Meta पहले ही AI को स्मार्ट ग्लास तक ले जा रही है. कंपनी Muse को अपने AI ग्लास से भी जोड़ने की तैयारी कर रही है, ताकि यूजर बिना फोन निकाले AI से बात कर सके. ऐसे में Muse Charm Meta की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें AI को फोन और कंप्यूटर की स्क्रीन से बाहर निकालकर ऐसे डिवाइस तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जो हमेशा यूजर के साथ रहें.