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Home > देश > हत्या कर निकाली आंखें, प्राइवेट पार्ट काटा, पाइप में छिपाई लाश; करम सिंह हत्या मामले में दो को उम्रकैद

हत्या कर निकाली आंखें, प्राइवेट पार्ट काटा, पाइप में छिपाई लाश; करम सिंह हत्या मामले में दो को उम्रकैद

MP Murder: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में हुई करम सिंह हत्या मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है. कोर्ट ने निर्मम हत्या को अंजाम देने वाले दो लोगों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है.

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Last Updated: October 16, 2026 21:53:03 IST

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MP Murder: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में एक पुराने विवाद का अंत बेहद दर्दनाक वारदात के रूप में हुआ. मजदूरी के लिए घर से निकले करम सिंह सेनानाई अचानक लापता हो गए. परिवार और परिचित उनकी तलाश कर रहे थे, तभी उनका शव एक पुलिया के नीचे पाइप में मिला. जांच में सामने आए तथ्यों ने मामले को और गंभीर बना दिया. अब इस हत्याकांड में अदालत ने दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. वहीं तीन अन्य आरोपियों को संदेह का बताते हुए बरी कर दिया गया.

लापता होने के बाद शुरू हुई तलाश

अभियोजन पक्ष के उप संचालक महेश पटेल के अनुसार, 2 जनवरी 2026 को सुभाष ने पलसूद थाने में सूचना दी थी कि दनोद गांव के रहने वाले करम सिंह काम के लिए घर से निकले थे लेकिन वापस नहीं लौटे. उनका मोबाइल भी बंद आ रहा था. तलाश के दौरान सुभाष और दो अन्य लोगों को राजपुर क्षेत्र के छिंदीघाटी में पुलिया के नीचे बने पाइप में करम सिंह का शव मिला. इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.

उधार के पैसों और विवाद से जुड़ा मामला

जांच में पुराने विवाद की बात सामने आई. अभियोजन के मुताबिक, करम सिंह ने आरोपियों में से एक से 15 हजार रुपये उधार लिए थे. रकम वापस मांगने पहुंची आरोपी की पत्नी के साथ छेड़छाड़ को लेकर विवाद हुआ था. महिला ने इसकी जानकारी अपने पति को दी, जिसके बाद करम सिंह की हत्या की साजिश रचे जाने का आरोप लगा. अभियोजन के अनुसार, दोनों आरोपी करम सिंह को नहर की ओर ले गए. वहां उन पर चाकू और पत्थर से हमला किया गया. इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई. फिर आरोपियों ने उनकी आंखें निकाल लीं और प्राइवेट पार्ट भी काट दिया. हत्या के बाद शव को पुलिया के नीचे पाइप में छिपा दिया गया था.

दो आरोपियों को उम्रकैद

पुलिस जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी अहम कड़ी बना. अभियोजन ने बताया कि वारदात वाले दिन करम सिंह और दोनों आरोपियों के बीच कई बार फोन पर बातचीत हुई थी. मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी एक्ट) एलडी सोलंकी ने उका उर्फ सीताराम और भाया उर्फ भयराम को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. वहीं, मृतक के पिता समेत तीन आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया.

ये भी पढ़ें: UP Crime: मुस्कान के बाद अब रविता और प्रेमी को फांसी, पति की हत्या कर शव के पास छोड़ा सांप!

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MP Murder: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में एक पुराने विवाद का अंत बेहद दर्दनाक वारदात के रूप में हुआ. मजदूरी के लिए घर से निकले करम सिंह सेनानाई अचानक लापता हो गए. परिवार और परिचित उनकी तलाश कर रहे थे, तभी उनका शव एक पुलिया के नीचे पाइप में मिला. जांच में सामने आए तथ्यों ने मामले को और गंभीर बना दिया. अब इस हत्याकांड में अदालत ने दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. वहीं तीन अन्य आरोपियों को संदेह का बताते हुए बरी कर दिया गया.

लापता होने के बाद शुरू हुई तलाश

अभियोजन पक्ष के उप संचालक महेश पटेल के अनुसार, 2 जनवरी 2026 को सुभाष ने पलसूद थाने में सूचना दी थी कि दनोद गांव के रहने वाले करम सिंह काम के लिए घर से निकले थे लेकिन वापस नहीं लौटे. उनका मोबाइल भी बंद आ रहा था. तलाश के दौरान सुभाष और दो अन्य लोगों को राजपुर क्षेत्र के छिंदीघाटी में पुलिया के नीचे बने पाइप में करम सिंह का शव मिला. इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.

उधार के पैसों और विवाद से जुड़ा मामला

जांच में पुराने विवाद की बात सामने आई. अभियोजन के मुताबिक, करम सिंह ने आरोपियों में से एक से 15 हजार रुपये उधार लिए थे. रकम वापस मांगने पहुंची आरोपी की पत्नी के साथ छेड़छाड़ को लेकर विवाद हुआ था. महिला ने इसकी जानकारी अपने पति को दी, जिसके बाद करम सिंह की हत्या की साजिश रचे जाने का आरोप लगा. अभियोजन के अनुसार, दोनों आरोपी करम सिंह को नहर की ओर ले गए. वहां उन पर चाकू और पत्थर से हमला किया गया. इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई. फिर आरोपियों ने उनकी आंखें निकाल लीं और प्राइवेट पार्ट भी काट दिया. हत्या के बाद शव को पुलिया के नीचे पाइप में छिपा दिया गया था.

दो आरोपियों को उम्रकैद

पुलिस जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी अहम कड़ी बना. अभियोजन ने बताया कि वारदात वाले दिन करम सिंह और दोनों आरोपियों के बीच कई बार फोन पर बातचीत हुई थी. मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी एक्ट) एलडी सोलंकी ने उका उर्फ सीताराम और भाया उर्फ भयराम को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. वहीं, मृतक के पिता समेत तीन आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया.

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