Vande Mataram Bill Passed: एक तरफ लोकसभा में जहां लोक परीक्षा संशोधन विधेयक बिल पास हुआ तो दूसरी तरफ राज्यसभा में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ पास हुआ. जब इस बिल को राज्यसभा में पास किया जा रहा था, तब विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया. यह विधेयक, जो राष्ट्रीय गीत का अपमान करने या उसमें बाधा डालने को आपराधिक अपराध बनाता है, अब विचार के लिए लोकसभा भेजा जाएगा.
अगर लोकसभा में पास हो जाता है, तो कानून के तौर पर लागू होने से पहले इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा. ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’, जिसे आम तौर पर ‘वंदे मातरम’ विधेयक के नाम से जाना जाता है, राष्ट्रीय गीत को कानूनी सुरक्षा देगा. पहले यह विधेयक सिर्फ तिरंगे, संविधान और राष्ट्रगान पर लागू होता था.
विधेयक की बड़ी बातें
- यह विधेयक 24 जुलाई को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में पेश किया था.
- 2026 के मॉनसून सत्र से पहले सरकार ने 2025 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर एक विशेष चर्चा भी की थी.
- सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय गीत की गरिमा की रक्षा के लिए इस कानून की जरूरत है, जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी.
- विधेयक के प्रावधानों के आधार पर वंदे मातरम के गायन में बाधा डालने या उसका अपमान करने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
- विधेयक में राष्ट्रीय गीत के सभी छह छंदों को गाने की भी बात कही गई है. यह गृह मंत्रालय के उस आदेश के बाद आया है जिसमें राज्यों को सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत बजाने या गाने के लिए कहा गया था, खासकर उन कार्यक्रमों में जहां राष्ट्रगान बजाया जाता है. आदेश में कहा गया है कि जब राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान गाए या बजाए जाते हैं, तो पहले राष्ट्रीय गीत गाया या बजाया जाएगा और यह भी कहा गया है कि इसे ‘अटेंशन’ (सावधान) की मुद्रा में खड़े होकर गाया जाना चाहिए.
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विपक्ष ने की आलोचना
वंदे मातरम के बारे में गृह मंत्रालय के 2025 के निर्देश के बाद कई विपक्षी नेताओं और राज्यों ने इस विधेयक की आलोचना की है. सरकारी कार्यक्रमों के लिए राज्य विधानसभाओं में ‘वंदे मातरम’ बजाना अनिवार्य करने पर भी विवाद हुआ, क्योंकि कई राज्यों का कहना था कि इस अनिवार्य आदेश से क्षेत्रीय गौरव, राज्य की स्वायत्तता और धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों को खतरा है.
संसद के मॉनसून सत्र के दौरान कई विपक्षी नेताओं ने की बिल की आलोचना
संसद के मॉनसून सत्र के दौरान कई विपक्षी नेताओं ने इस बिल की आलोचना जारी रखी. उनका कहना था कि राष्ट्रीय गीत को शामिल करने के लिए किया गया संशोधन भारतीय संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है. उच्च सदन में बिल पेश किए जाने से पहले कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) (CPI(M)) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने इस पर पुनर्विचार करने की मांग की. उन्होंने तर्क दिया कि यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 19, 21 और 25 से जुड़े मुद्दे उठाता है, जो बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अंतरात्मा की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं.
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