Rajasthan Fake Doctor Case: फिल्म मुन्नाभाई MBBS में संजय दत्त का किरदार फर्जी तरीके से डॉक्टर बन जाता है लेकिन राजस्थान में सामने आया मामला इससे कहीं ज्यादा गंभीर है. यहां फिल्म जैसा ही कुछ सामने आया है. एक ऐसे शख्स पर डॉक्टर बनकर अस्पताल चलाने का आरोप है, जो कथित तौर पर आठवीं पास है. इतना ही नहीं, उसके अस्पताल में मरीजों के ऑपरेशन किए जाने की बात भी सामने आई है. इस मामले में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में फर्जी डिग्रियों और मेडिकल रजिस्ट्रेशन से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.
फर्जी डॉक्टर बना नानजीराम चौधरी
जालोर के रानीवाड़ा में भास्कर हॉस्पिटल चलाने वाले नानजीराम चौधरी पर आरोप है कि उसने फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के सहारे डॉक्टर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराया. बताया जाता है कि वह पहले अस्पताल के ओपीडी काउंटर पर मरीजों की पर्चियां बनाता था. जांच के मुताबिक, उसने 2015 में राजदेव हॉस्पिटल खरीदा और अगले साल उसका नाम बदलकर भास्कर हॉस्पिटल कर दिया. आरोप है कि आठवीं पास होने के बावजूद उसने दसवीं-बारहवीं की मार्कशीट, MBBS डिग्री और गायनेकोलॉजी व ऑब्स्टेट्रिक्स के डिप्लोमा से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल किए. अस्पताल में करीब 100 बेड हैं और यहां ऑपरेशन किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है. अब अस्पताल के रिकॉर्ड और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है.
पंकज यादव ने पास नहीं की परीक्षा
दूसरे आरोपी पंकज यादव ने 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान में MBBS की पढ़ाई की थी. हालांकि, भारत में डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने के लिए जरूरी FMGE परीक्षा वह कथित तौर पर छह बार पास नहीं कर पाया. SOG के मुताबिक, इसके बाद उसने बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज, मुजफ्फरपुर के नाम पर कथित फर्जी MBBS डिग्री और मार्कशीट बनवाईं. बिहार मेडिकल काउंसिल के फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के इस्तेमाल का आरोप भी है. संबंधित संस्थानों से जांच कराने पर दस्तावेज फर्जी पाए गए। SOG ने उसे हरियाणा के कैथल से गिरफ्तार किया.
दो साल पहले दर्ज हुई थी शिकायत
इस मामले की शुरुआत 6 अक्टूबर 2024 को राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरिधर गोपाल की शिकायत से हुई थी. अशोक नगर थाने में दर्ज केस में शुरुआत में आठ लोगों के नाम सामने आए थे. बाद की जांच में नानजीराम चौधरी के खिलाफ भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन कराने का मामला जुड़ा. जांच SOG को सौंप दी गई। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी डिग्रियां किसने तैयार कीं, इस नेटवर्क में और कौन शामिल है और संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की कोई भूमिका थी या नहीं. आरोपों की पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी.
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