Pawan Khera Bail Case: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (15 अप्रैल, 2026) को तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को ट्रांजिट अग्रिम ज़मानत दी गई थी. यह ज़मानत असम पुलिस द्वारा दर्ज एक एफआईआर के सिलसिले में दी गई थी. यह एफआईआर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की शिकायत पर दर्ज की गई थी. खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिंकी भुइयां सरमा के पास अलग-अलग देशों के कई पासपोर्ट हैं.
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चांदुरकर की बेंच ने यह अंतरिम आदेश तब पारित किया, जब उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ असम राज्य द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि अगर खेड़ा असम में अधिकार क्षेत्र रखने वाले किसी कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित इस अंतरिम आदेश का ऐसे आवेदन पर विचार करने की प्रक्रिया पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा. असम राज्य की ओर से पेश हुए भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि खेड़ा की याचिका में ऐसा कोई बयान नहीं था जिससे यह पता चले कि तेलंगाना में इस मामले का क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र कैसे बनता है.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दी ये दलील
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी दलील दी कि हाई कोर्ट इस तथ्य को नज़रअंदाज़ कर गया कि इसमें शामिल अपराधों में से एक के लिए अधिकतम 10 साल की कैद की सज़ा का प्रावधान है. जस्टिस माहेश्वरी ने टिप्पणी की कि सुनवाई के दौरान खेड़ा द्वारा जमा किए गए नोट में कहा गया था कि उनकी पत्नी हैदराबाद में रह रही हैं. हालांकि एसजी ने जवाब दिया कि उनकी पत्नी के आधार कार्ड में उन्हें दिल्ली का निवासी दिखाया गया है.