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हरिद्वार से दिल्ली-NCR तक गंगनहर बंद होने का असर, कहीं सूखे घाट तो कहीं पानी और सिंचाई की बढ़ी चिंता

Ganga Closure Impact: गंगनहर का पानी बंद कर दिया गया है. साफ-सफाई को देखते हुए ये कदम उठाया गया है. इसका असर केवल हरिद्वार तक ही नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR तक दिखाई दे सकता है.

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Last Updated: October 21, 2026 17:23:13 IST

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Ganga Closure Impact: हर साल दशहरे के बाद गंगनहर का पानी बंद होते ही इसका असर हरिद्वार से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR तक दिखाई देने लगता है. हरिद्वार की हरकी पैड़ी पर जहां श्रद्धालुओं को गंगा स्नान के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता. वहीं दूसरी ओर गंगाजल पर निर्भर शहरों में पेयजल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ जाती है. किसानों के सामने भी सिंचाई के लिए दूसरे साधनों का इस्तेमाल करने की चुनौती खड़ी हो जाती है. दरअसल, गंगनहर की सालाना बंदी का मकसद सफाई, गाद निकालना और मरम्मत जैसे जरूरी काम करना है.

कम हो जाती है जलधारा

गंगनहर की शुरुआत हरिद्वार के भीमगौड़ा बैराज से होती है. जब रखरखाव के लिए इसका पानी रोका जाता है, तो हरकी पैड़ी और ब्रह्मकुंड जैसे प्रमुख घाटों पर गंगा की धारा काफी कम हो जाती है. इससे स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करने आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी होती है. रुड़की से आगे मुजफ्फरनगर और आसपास के नहर क्षेत्रों में भी पानी का स्तर घट जाता है. कई स्थानों पर नहर का तल दिखाई देने लगता है. हालांकि, धार्मिक गतिविधियों के लिए सीमित मात्रा में पानी छोड़े जाने की व्यवस्था की जा सकती है.

दिल्ली-NCR में पेयजल आपूर्ति पर असर

गंगनहर बंद होने का प्रभाव केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं रहता. गंगाजल पर निर्भर दिल्ली-NCR के कई इलाकों में भी पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. गाजियाबाद के प्रताप विहार और सिद्धार्थ विहार स्थित गंगाजल ट्रीटमेंट प्लांट को पानी की उपलब्धता में कमी का सामना करना पड़ सकता है. इसका असर इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, कौशांबी और आसपास की कॉलोनियों पर पड़ सकता है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा के उन इलाकों में भी आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है, जो गंगाजल पर निर्भर हैं. पूर्वी दिल्ली के कुछ हिस्सों में भी इसका सीमित असर हो सकता है.

किसानों को ट्यूबवेल का सहारा

गंगनहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों की खेती के लिए महत्वपूर्ण है. मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत, शामली, हापुड़ और बुलंदशहर समेत कई क्षेत्रों में किसान सिंचाई के लिए नहर के पानी पर निर्भर रहते हैं. नहर बंद होने के दौरान किसानों को गेहूं की बुवाई की तैयारी और गन्ने की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल जैसे वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है. इससे सिंचाई का खर्च भी बढ़ सकता है. 

ये भी पढ़ें: मुस्कान को फांसी की सजा, मेरठ जेल में बंद हैं कई पत्नियां; आरोपों की कहानी सुनकर उड़ जाएंगे मर्द समाज के होश!

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Ganga Closure Impact: हर साल दशहरे के बाद गंगनहर का पानी बंद होते ही इसका असर हरिद्वार से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR तक दिखाई देने लगता है. हरिद्वार की हरकी पैड़ी पर जहां श्रद्धालुओं को गंगा स्नान के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता. वहीं दूसरी ओर गंगाजल पर निर्भर शहरों में पेयजल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ जाती है. किसानों के सामने भी सिंचाई के लिए दूसरे साधनों का इस्तेमाल करने की चुनौती खड़ी हो जाती है. दरअसल, गंगनहर की सालाना बंदी का मकसद सफाई, गाद निकालना और मरम्मत जैसे जरूरी काम करना है.

कम हो जाती है जलधारा

गंगनहर की शुरुआत हरिद्वार के भीमगौड़ा बैराज से होती है. जब रखरखाव के लिए इसका पानी रोका जाता है, तो हरकी पैड़ी और ब्रह्मकुंड जैसे प्रमुख घाटों पर गंगा की धारा काफी कम हो जाती है. इससे स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करने आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी होती है. रुड़की से आगे मुजफ्फरनगर और आसपास के नहर क्षेत्रों में भी पानी का स्तर घट जाता है. कई स्थानों पर नहर का तल दिखाई देने लगता है. हालांकि, धार्मिक गतिविधियों के लिए सीमित मात्रा में पानी छोड़े जाने की व्यवस्था की जा सकती है.

दिल्ली-NCR में पेयजल आपूर्ति पर असर

गंगनहर बंद होने का प्रभाव केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं रहता. गंगाजल पर निर्भर दिल्ली-NCR के कई इलाकों में भी पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. गाजियाबाद के प्रताप विहार और सिद्धार्थ विहार स्थित गंगाजल ट्रीटमेंट प्लांट को पानी की उपलब्धता में कमी का सामना करना पड़ सकता है. इसका असर इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, कौशांबी और आसपास की कॉलोनियों पर पड़ सकता है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा के उन इलाकों में भी आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है, जो गंगाजल पर निर्भर हैं. पूर्वी दिल्ली के कुछ हिस्सों में भी इसका सीमित असर हो सकता है.

किसानों को ट्यूबवेल का सहारा

गंगनहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों की खेती के लिए महत्वपूर्ण है. मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत, शामली, हापुड़ और बुलंदशहर समेत कई क्षेत्रों में किसान सिंचाई के लिए नहर के पानी पर निर्भर रहते हैं. नहर बंद होने के दौरान किसानों को गेहूं की बुवाई की तैयारी और गन्ने की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल जैसे वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है. इससे सिंचाई का खर्च भी बढ़ सकता है. 

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