Dinesh Sharma Andaman Nicobar Lieutenant Governor: भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. शनिवार देर रात राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में इस बात की जानकारी दी गई है.
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, भारत की राष्ट्रपति ने डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल पद पर नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है. यह नियुक्ति उस दिन से प्रभावी होगी, जिस दिन से वे अपना पद संभालेंगे.
62 वर्षीय डॉ. दिनेश शर्मा इससे पहले उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं. वर्तमान में वे राज्यसभा के सांसद हैं और राज्यसभा के उप-सभापति के पैनल में भी शामिल हैं. राज्यसभा में उनका कार्यकाल इसी वर्ष 25 नवंबर को पूरा होने वाला था.
कौन हैं डॉ. दिनेश शर्मा
12 जनवरी 1964 को लखनऊ में जन्मे डॉ. दिनेश शर्मा की राजनीतिक प्रतिभा को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पहचाना था. उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की थी. इसके बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्हें राजनीति में बड़ी पहचान मिली.
लगातार दो बार बने लखनऊ के महापौर
लखनऊ विश्वविद्यालय के वाणिज्य (कॉमर्स) विभाग में प्रोफेसर रहे डॉ. दिनेश शर्मा 2006 से मार्च 2018 तक लगातार दो बार लखनऊ के मेयर रहे. इस दौरान वे ‘यूपी मेयर काउंसिल’ के अध्यक्ष पद पर भी रहे. भाजपा संगठन में उन्होंने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समेत कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं. वे गुजरात के पार्टी प्रभारी रहने के साथ-साथ हरियाणा में मुख्यमंत्री और राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए पर्यवेक्षक भी बनाए गए थे.
2023 में बने राज्यसभा सांसद
2017 से 2022 तक उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने माध्यमिक व उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे मंत्रालयों को संभाला. 2022 का विधानसभा चुनाव न लड़ने के बाद, भाजपा ने 2023 में उन्हें राज्यसभा भेजा. तब से वे संसद के उच्च सदन में सांसद के तौर पर काम कर रहे थे.
संसदीय राजभाषा समिति के संयोजक
सांसद रहने के दौरान वे संसदीय राजभाषा समिति के प्रमुख सदस्य रहे और इसकी पहली उप-समिति के संयोजक की भूमिका भी निभाई. यह समिति सरकारी कामकाज में हिंदी भाषा के इस्तेमाल और प्रगति की समीक्षा करने का काम करती है.