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यूरोप में थम नहीं रहा गर्मी का कहर! हीटवेव से मरने वालों की संख्या में हुई तेज वृद्धि, कई हजार  लोगों की गई जान

यूरोपियन मॉर्टेलिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क ने एक विश्लेषण में बताया कि यूरोप में लू के कारण सामान्य संख्या की तुलना में लगभग 16,000 अधिक लोगों की मौत हुई.

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Published: August 15, 2026 22:20:35 IST
Last Updated: August 15, 2026 22:20:35 IST

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Heatwave in Europe: यूरोप के कई देशों में अभी भी भीषण हीटवेव का कहर जारी है. जून में एक सप्ताह तक चली भीषण गर्मी की लहर के बाद यूरोप में मौतों में ऐतिहासिक वृद्धि हुई. 
 
इनमें से अधिकांश मौतें उत्तरी यूरोपीय देशों जैसे फ्रांस, बेल्जियम और जर्मनी में हुईं हैं, जहां के लोग इतने उच्च तापमान के आदी नहीं हैं. यूरोपियन मॉर्टेलिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क ने एक विश्लेषण में बताया कि यूरोप में लू के कारण सामान्य संख्या की तुलना में लगभग 16,000 अधिक लोगों की मौत हुई.
 

तेजी से बढ़ रहा तापमान 

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, जब यूरोप भर में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया, तो केवल उत्तर-पश्चिमी देशों में ही मौतों में तेजी से वृद्धि हुई क्योंकि वे उस गर्मी के लिए तैयार नहीं थे. उत्तर में एयर कंडीशनिंग का कम उपयोग भी एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है. वहीं, दक्षिणी यूरोपीय देशों के पास गर्मी से निपटने के तरीके हैं, क्योंकि वे सदियों से उच्च तापमान का सामना करते आ रहे हैं. बता दें कि जून में लू के कारण होने वाली मौतें सर्दियों की तुलना में अधिक थीं, जब वायरस के कारण होने वाली श्वसन संबंधी बीमारियां व्यापक रूप से फैलती हैं.
 

आमतौर पर यूरोपीय देशों का तापमान रहता है कम 

यूरोप में लगभग सभी देशों में सालभर तापमान ठंडा रहता है. इन देशों में लू बहुत कम चलती है, और आखिरी बार ऐसी लू 2003 में आई थी, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई थी. यूरोपियन मॉर्टेलिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क ने बताया कि 2022 में भी जुलाई में लू के कारण 16,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. उस समय स्पेन में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था. हालांकि जून में तापमान अब तक का सबसे अधिक गर्म रहा, लेकिन वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के और भी गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
 

यूरोप को एक और लू का सामना करना पड़ सकता है

भीषण गर्मी के दौर के बाद यूरोप का अधिकांश हिस्सा एक और लू की चपेट में आने के लिए तैयार हो रहा है, जिसके कारण नदियों का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, ऐतिहासिक गर्मी भड़क उठी है और हजारों लोगों की मौत हो गई है. इस सप्ताह ब्रिटेन और फ्रांस के कुछ हिस्सों में पहले से ही भीषण गर्मी की चेतावनी जारी की गई थी, जिसमें तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का पूर्वानुमान था. ब्रिटेन के मौसम विभाग ने सप्ताहांत में चेतावनी दी कि गर्मी की पांचवीं भीषण लहर उस देश में दस्तक देने वाली है, जिसका बुनियादी ढांचा अधिक समशीतोष्ण, ठंडी जलवायु के लिए बनाया गया है.
 
वहीं फ्रांस में, राष्ट्रीय मौसम एजेंसी मेटियो-फ्रांस ने सोमवार को चेतावनी दी कि दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, और सप्ताह बढ़ने के साथ यह स्तर और भी फैल सकता है. एक बुलेटिन में कहा गया है, “बुधवार से शुक्रवार के बीच लगभग पूरा देश भीषण गर्मी से प्रभावित होगा.” एजेंसी ने यह भी चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन के कारण, “आने वाली गर्मियां आम तौर पर अब तक की तुलना में अधिक गर्म होंगी.”
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Published: August 15, 2026 22:20:35 IST
Last Updated: August 15, 2026 22:20:35 IST

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Heatwave in Europe: यूरोप के कई देशों में अभी भी भीषण हीटवेव का कहर जारी है. जून में एक सप्ताह तक चली भीषण गर्मी की लहर के बाद यूरोप में मौतों में ऐतिहासिक वृद्धि हुई. 
 
इनमें से अधिकांश मौतें उत्तरी यूरोपीय देशों जैसे फ्रांस, बेल्जियम और जर्मनी में हुईं हैं, जहां के लोग इतने उच्च तापमान के आदी नहीं हैं. यूरोपियन मॉर्टेलिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क ने एक विश्लेषण में बताया कि यूरोप में लू के कारण सामान्य संख्या की तुलना में लगभग 16,000 अधिक लोगों की मौत हुई.
 

तेजी से बढ़ रहा तापमान 

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, जब यूरोप भर में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया, तो केवल उत्तर-पश्चिमी देशों में ही मौतों में तेजी से वृद्धि हुई क्योंकि वे उस गर्मी के लिए तैयार नहीं थे. उत्तर में एयर कंडीशनिंग का कम उपयोग भी एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है. वहीं, दक्षिणी यूरोपीय देशों के पास गर्मी से निपटने के तरीके हैं, क्योंकि वे सदियों से उच्च तापमान का सामना करते आ रहे हैं. बता दें कि जून में लू के कारण होने वाली मौतें सर्दियों की तुलना में अधिक थीं, जब वायरस के कारण होने वाली श्वसन संबंधी बीमारियां व्यापक रूप से फैलती हैं.
 

आमतौर पर यूरोपीय देशों का तापमान रहता है कम 

यूरोप में लगभग सभी देशों में सालभर तापमान ठंडा रहता है. इन देशों में लू बहुत कम चलती है, और आखिरी बार ऐसी लू 2003 में आई थी, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई थी. यूरोपियन मॉर्टेलिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क ने बताया कि 2022 में भी जुलाई में लू के कारण 16,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी. उस समय स्पेन में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था. हालांकि जून में तापमान अब तक का सबसे अधिक गर्म रहा, लेकिन वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के और भी गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
 

यूरोप को एक और लू का सामना करना पड़ सकता है

भीषण गर्मी के दौर के बाद यूरोप का अधिकांश हिस्सा एक और लू की चपेट में आने के लिए तैयार हो रहा है, जिसके कारण नदियों का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, ऐतिहासिक गर्मी भड़क उठी है और हजारों लोगों की मौत हो गई है. इस सप्ताह ब्रिटेन और फ्रांस के कुछ हिस्सों में पहले से ही भीषण गर्मी की चेतावनी जारी की गई थी, जिसमें तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का पूर्वानुमान था. ब्रिटेन के मौसम विभाग ने सप्ताहांत में चेतावनी दी कि गर्मी की पांचवीं भीषण लहर उस देश में दस्तक देने वाली है, जिसका बुनियादी ढांचा अधिक समशीतोष्ण, ठंडी जलवायु के लिए बनाया गया है.
 
वहीं फ्रांस में, राष्ट्रीय मौसम एजेंसी मेटियो-फ्रांस ने सोमवार को चेतावनी दी कि दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, और सप्ताह बढ़ने के साथ यह स्तर और भी फैल सकता है. एक बुलेटिन में कहा गया है, “बुधवार से शुक्रवार के बीच लगभग पूरा देश भीषण गर्मी से प्रभावित होगा.” एजेंसी ने यह भी चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन के कारण, “आने वाली गर्मियां आम तौर पर अब तक की तुलना में अधिक गर्म होंगी.”
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