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Natural AC: ₹20,000 के AC को फेल कर देता है ₹200 का ये सस्ता-टिकाऊ जुगाड़, फायदे जान लिए तो आप भी घर भर लेंगे!

Natural AC for Home:गर्मियां अपने चरम पर हैं और सूरज की तपिश बर्दाश्त से बाहर होती जा रही है. ऐसे में दिन भर AC चलाना न तो जेब के लिए अच्छा है और न ही पर्यावरण के लिए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे पास सदियों पुराना एक ऐसा देसी जुगाड़ है जिसे 'Natural AC' कहा जाता है? ये बिजली के बिल को कम करते हुए घर में कूलिंग बढ़ाने का भी काम करता है, जानें क्या है ये जुगाड़

Written By: Kajal Jain
Last Updated: April 18, 2026 11:40:59 IST

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Natural AC for Home: भारत में बढ़ती गर्मी के कारण हमारे घरों में धूप की तपिश खूब कहर ढ़ाती है. ऐसी स्थिति में एयर कंडीशनर वरदान साबित होता है, जो तुरंत हीट दूर करके कूलिंग तो दे देता है. लेकिन इससे बिजली का बिल बढ़ जाता है. एसी बंद करते ही दोबारा हीट हो जाती है. ऐसी कंडीशन में क्यों न नेचर फ्रेंडली ऑप्शन्स की ओर बढ़ें, जो पहले जमाने में न के बराबर या बहुत ही कम बजट में कूलिंग देने का काम करता था. हम बात कर रहे हैं खस के पर्दों की. इन दिनों खस के पर्दे सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंडिंग हैं, जिसे लोग नेचुरल एसी भी कह रहे हैं, जानें इसके बारे में –

क्या है खस के पर्दों का राज़?

खस के पर्दे ‘वेटिवर’ नामक घास की जड़ों से बनाए जाते हैं. खस के आयुर्वेद में भी कई फायदे हैं. ये जड़ें न केवल ठंडी होती हैं, बल्कि इनमें एक बेहद सोंधी और नेचुरल खुशबू भी होती है. खस की जड़ें जमीन में करीब 10 फीट तक गहरी होती हैं, जिन्हें सुखाकर साफ किया जाता है और इससे चटाईयां और पर्दे बुने जाते हैं.

पुराने समय में ये राजा महाराजाओं के लिए नेचुरल एसी का काम करते थे. उस समय लगभग हर घर में खस के पर्दे लगे होते थे. आज भी मार्केट में आसानी से खस के पर्दे मिल जाते हैं. कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भी खस के पर्दे बेच रहे हैं. इन्हें खिड़कियों या दरवाजों पर लटकाया जाता है. इन पर्दों को पानी से भिगोना होता है, जिससे बाहर से आने वाली गर्म हवा टकराकर कूलिंग इफेक्ट देती है.

क्या सच में खस के पर्दे कारगर हैं?

खस के पर्दे कोई नया प्रोडक्ट नहीं है. नेचुरल और ग्रीन लाइफस्टाइल प्रमोट करने वाले सालों से खस के पर्दे इस्तेमाल कर रहे हैं. शहर हो या गांव, आज भी बालकनी और छतों पर खस के पर्दे लटकते मिल जाएंगे. 

  • शहरों में की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच खस के पर्दे जीरो कार्बन फुट प्रिंट रिलीज करते हैं.
  • खस की जड़ों से निकलने वाली खूशबू वातावरण को हल्का और खुशनुमा बना देती है. 
  • इसके पर्दे से आने वाली सोंधी खुशबू स्ट्रेस-फ्री इनवायरमेंट क्रिएट करने में थेरेपी जैसे काम करता है.
  • खस के पर्दों का हलका ब्राउन गोल्डन रंग घर को एस्थेटिक और मिनिमलिस्ट इंडियन लुक देता है.
  • खस की जड़ों का तेल अरोमाथेरेपी में भी यूज किया जाता है, जो पहली बारिश, भीगी मिट्टी और लकड़ी जैसी सुगंध देता है.
  • एक बार खरीदने पर खस के पर्दे 3 से 4 गर्मियों में काम करेंगे और बिजली की खपत को कंट्रोल कराएंगे.
  • ये मक्खी मच्छरों को रोककर घर की हवा में क्रॉस वेंटीलेशन का काम करते हैं.

इन बातों का रखें खास ध्यान

  • गर्मी में खस के पर्दे को खिड़की जंगलों पर लगाने के बाद धूल ना जमने दें. इसे साफ करते रहना चाहिए.
  • मानसून आने पर खस के पर्दों को साफ पानी से धो देना चाहिए, ताकि इसमें जमी धूल और गले हुए कण निकल जाएं.
  • खस की जड़ को सीजन के बाद धोकर धूप में सुखाएं और उसके बाद लपेटकर सूखी और हवादार जगह में रखें, वरना इसमें मच्छर और फफूंद लगने की संभावना रहती है.
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Last Updated: April 18, 2026 11:40:59 IST

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Natural AC for Home: भारत में बढ़ती गर्मी के कारण हमारे घरों में धूप की तपिश खूब कहर ढ़ाती है. ऐसी स्थिति में एयर कंडीशनर वरदान साबित होता है, जो तुरंत हीट दूर करके कूलिंग तो दे देता है. लेकिन इससे बिजली का बिल बढ़ जाता है. एसी बंद करते ही दोबारा हीट हो जाती है. ऐसी कंडीशन में क्यों न नेचर फ्रेंडली ऑप्शन्स की ओर बढ़ें, जो पहले जमाने में न के बराबर या बहुत ही कम बजट में कूलिंग देने का काम करता था. हम बात कर रहे हैं खस के पर्दों की. इन दिनों खस के पर्दे सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंडिंग हैं, जिसे लोग नेचुरल एसी भी कह रहे हैं, जानें इसके बारे में –

क्या है खस के पर्दों का राज़?

खस के पर्दे ‘वेटिवर’ नामक घास की जड़ों से बनाए जाते हैं. खस के आयुर्वेद में भी कई फायदे हैं. ये जड़ें न केवल ठंडी होती हैं, बल्कि इनमें एक बेहद सोंधी और नेचुरल खुशबू भी होती है. खस की जड़ें जमीन में करीब 10 फीट तक गहरी होती हैं, जिन्हें सुखाकर साफ किया जाता है और इससे चटाईयां और पर्दे बुने जाते हैं.

पुराने समय में ये राजा महाराजाओं के लिए नेचुरल एसी का काम करते थे. उस समय लगभग हर घर में खस के पर्दे लगे होते थे. आज भी मार्केट में आसानी से खस के पर्दे मिल जाते हैं. कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भी खस के पर्दे बेच रहे हैं. इन्हें खिड़कियों या दरवाजों पर लटकाया जाता है. इन पर्दों को पानी से भिगोना होता है, जिससे बाहर से आने वाली गर्म हवा टकराकर कूलिंग इफेक्ट देती है.

क्या सच में खस के पर्दे कारगर हैं?

खस के पर्दे कोई नया प्रोडक्ट नहीं है. नेचुरल और ग्रीन लाइफस्टाइल प्रमोट करने वाले सालों से खस के पर्दे इस्तेमाल कर रहे हैं. शहर हो या गांव, आज भी बालकनी और छतों पर खस के पर्दे लटकते मिल जाएंगे. 

  • शहरों में की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच खस के पर्दे जीरो कार्बन फुट प्रिंट रिलीज करते हैं.
  • खस की जड़ों से निकलने वाली खूशबू वातावरण को हल्का और खुशनुमा बना देती है. 
  • इसके पर्दे से आने वाली सोंधी खुशबू स्ट्रेस-फ्री इनवायरमेंट क्रिएट करने में थेरेपी जैसे काम करता है.
  • खस के पर्दों का हलका ब्राउन गोल्डन रंग घर को एस्थेटिक और मिनिमलिस्ट इंडियन लुक देता है.
  • खस की जड़ों का तेल अरोमाथेरेपी में भी यूज किया जाता है, जो पहली बारिश, भीगी मिट्टी और लकड़ी जैसी सुगंध देता है.
  • एक बार खरीदने पर खस के पर्दे 3 से 4 गर्मियों में काम करेंगे और बिजली की खपत को कंट्रोल कराएंगे.
  • ये मक्खी मच्छरों को रोककर घर की हवा में क्रॉस वेंटीलेशन का काम करते हैं.

इन बातों का रखें खास ध्यान

  • गर्मी में खस के पर्दे को खिड़की जंगलों पर लगाने के बाद धूल ना जमने दें. इसे साफ करते रहना चाहिए.
  • मानसून आने पर खस के पर्दों को साफ पानी से धो देना चाहिए, ताकि इसमें जमी धूल और गले हुए कण निकल जाएं.
  • खस की जड़ को सीजन के बाद धोकर धूप में सुखाएं और उसके बाद लपेटकर सूखी और हवादार जगह में रखें, वरना इसमें मच्छर और फफूंद लगने की संभावना रहती है.
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