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Home > राज्य > छत्तीसगढ़ > क्या होता है मसीही विवाह, जहां कन्यादान की जगह होता है वरदान; विदाई पर फूट-फूटकर रोता है दूल्हा

क्या होता है मसीही विवाह, जहां कन्यादान की जगह होता है वरदान; विदाई पर फूट-फूटकर रोता है दूल्हा

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में शादी में शामिल होने वाले बरातियों ने भी कहा कि वो भी ऐसी अनोखी शादी में पहली बार शामिल हुए, जहां लड़की की बरात लड़के के घर आई. इसके बाद दुल्हन ने दूल्हे की विदाई कराई.

Written By: JP YADAV
Last Updated: April 20, 2026 10:51:47 IST

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What Is Masihi Marriage: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां पर एक अनोखी शादी चर्चा का विषय बन गई है. यहां पर दूल्हा नहीं बल्कि दुल्हन बरात लेकर आई. इसके बाद शादी-समारोह की सारी रस्में हुईं. इस शादी में सैकड़ों मेहमान शामिल हुए, जिनमें घराती भी शामिल हुए.   इस शादी में एक और खास-अनोखी परंपरा निभाई गई. इसमें कन्या दान की जगह वरदान हुआ. फिलहाल इस विवाद की चर्चा दूर-दूर तक हो रही है. यह विवाह मसीही परम्परा के अनुसार, हुआ, जिसमें सभी रीति रिवाज निभाए गए. इसके बाद दुल्हन देवमुनि एक्का और दुल्हा बिलासुस बरवा की शादी संपन्न हुई.

यहां पर पता दें कि छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सुलपगा गांव में यह अनोखी शादी हुई, जो अब चर्चा का विषय बनी हुई है. यहां पर परंपरा को चुनौती देकर दुल्हन देवमुनि एक्का दुल्हे के घर बरात लेकर पहुंची. इसके बाद मसीही परंपरा के रीति रिवाज से दुल्हन देवमुनि एक्का और दुल्हा बिलासुस बरवा का विवाह संपन्न हुआ.

कन्या दान की जगह हुआ वरदान

बरात विदाई के समय दुल्हन को दुल्हा का हाथ थमाया गया. इस विवाह में खासबात अनोखी परम्परा रही जिसमें दुल्हन बरात दूल्हे के घर लेकर आई और कन्या दान कि जगह वरदान हुआ. 

फूट-फूटकर रोया दूल्हा

शादी के बाद दूल्हे की विदाई हुई. इस दौरान दुल्हा फूट-फूट कर रोने लगा. आपने हमेशा दुल्हन को विदाई में रोते देखा होगा लेकिन इस विदाई में  दुल्हा रोया और यही अलग परम्परा ने इस शादी को बेहद अलग और खास बना दिया. दरअसल दुल्हन का एक भी भाई नहीं है  चार बहने हैं. पिता खेती किसानी का काम करते हैं.ऐसे में दुल्हन के पिता किसी बेटे कि तलाश में थे. जब अपनी बेटी का रिश्ता बरवा परिवार से हाथ मिलाया तो शादी कि अनोखी रस्में निभाई गई दुल्हा की जगह दुल्हन बरात लेकर दुल्हे को लेने आई. दुल्हा की देर शाम मसीही रीति-रिवाज के मुताबिक विदाई हुई.

पिता का दावा, दामाद को रखेंगे बेटे की तरह

 दुल्हन के पिता मोहन एक्का का कहना है कि वह दूल्हे को अपने घर ले जाकर बेटे की तरह रखेंगे. शादी पूरी तरह उनके रीति-रिवाजों के अनुसार हुई. इस शादी की सबसे खास बात यह रही कि यहां दूल्हे की विदाई हुई, आमतौर पर दुल्हन की विदाई होती है, लेकिन इस बार दूल्हे को दुल्हन की तरह विदा कर लड़की के घर ले जाया गया.

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Written By: JP YADAV
Last Updated: April 20, 2026 10:51:47 IST

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What Is Masihi Marriage: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां पर एक अनोखी शादी चर्चा का विषय बन गई है. यहां पर दूल्हा नहीं बल्कि दुल्हन बरात लेकर आई. इसके बाद शादी-समारोह की सारी रस्में हुईं. इस शादी में सैकड़ों मेहमान शामिल हुए, जिनमें घराती भी शामिल हुए.   इस शादी में एक और खास-अनोखी परंपरा निभाई गई. इसमें कन्या दान की जगह वरदान हुआ. फिलहाल इस विवाद की चर्चा दूर-दूर तक हो रही है. यह विवाह मसीही परम्परा के अनुसार, हुआ, जिसमें सभी रीति रिवाज निभाए गए. इसके बाद दुल्हन देवमुनि एक्का और दुल्हा बिलासुस बरवा की शादी संपन्न हुई.

यहां पर पता दें कि छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सुलपगा गांव में यह अनोखी शादी हुई, जो अब चर्चा का विषय बनी हुई है. यहां पर परंपरा को चुनौती देकर दुल्हन देवमुनि एक्का दुल्हे के घर बरात लेकर पहुंची. इसके बाद मसीही परंपरा के रीति रिवाज से दुल्हन देवमुनि एक्का और दुल्हा बिलासुस बरवा का विवाह संपन्न हुआ.

कन्या दान की जगह हुआ वरदान

बरात विदाई के समय दुल्हन को दुल्हा का हाथ थमाया गया. इस विवाह में खासबात अनोखी परम्परा रही जिसमें दुल्हन बरात दूल्हे के घर लेकर आई और कन्या दान कि जगह वरदान हुआ. 

फूट-फूटकर रोया दूल्हा

शादी के बाद दूल्हे की विदाई हुई. इस दौरान दुल्हा फूट-फूट कर रोने लगा. आपने हमेशा दुल्हन को विदाई में रोते देखा होगा लेकिन इस विदाई में  दुल्हा रोया और यही अलग परम्परा ने इस शादी को बेहद अलग और खास बना दिया. दरअसल दुल्हन का एक भी भाई नहीं है  चार बहने हैं. पिता खेती किसानी का काम करते हैं.ऐसे में दुल्हन के पिता किसी बेटे कि तलाश में थे. जब अपनी बेटी का रिश्ता बरवा परिवार से हाथ मिलाया तो शादी कि अनोखी रस्में निभाई गई दुल्हा की जगह दुल्हन बरात लेकर दुल्हे को लेने आई. दुल्हा की देर शाम मसीही रीति-रिवाज के मुताबिक विदाई हुई.

पिता का दावा, दामाद को रखेंगे बेटे की तरह

 दुल्हन के पिता मोहन एक्का का कहना है कि वह दूल्हे को अपने घर ले जाकर बेटे की तरह रखेंगे. शादी पूरी तरह उनके रीति-रिवाजों के अनुसार हुई. इस शादी की सबसे खास बात यह रही कि यहां दूल्हे की विदाई हुई, आमतौर पर दुल्हन की विदाई होती है, लेकिन इस बार दूल्हे को दुल्हन की तरह विदा कर लड़की के घर ले जाया गया.

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