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दिल्ली के 40 हॉटस्पॉट पर हवा साफ करने की तैयारी, सरकार खर्च करेगी 104 करोड़ रुपये, शर्तें तय

Delhi Pollution: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है. सरकार ने इसके लिए नई योजना बनाई है. सरकार ने 40 हॉटस्पॉट पर विशेष उपकरण लगाने की बात कही है.

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Last Updated: October 21, 2026 20:20:37 IST

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Delhi Pollution: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने नई योजना बनाई है. इसके तहत राजधानी के 40 ऐसे इलाकों में हवा साफ करने के लिए विशेष उपकरण लगाए जाएंगे, जहां प्रदूषण की समस्या ज्यादा है. इस काम पर करीब 104 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. खास बात यह है कि निजी कंपनियों को पैसा उनके काम के नतीजों के आधार पर मिलेगा.

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने इस योजना को 40 अलग-अलग हिस्सों में बांटा है. हर हिस्से के लिए करीब 2.6 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. कंपनियों को ऐसी तकनीक इस्तेमाल करनी होगी, जिससे हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 का स्तर कम हो सके.

सरकार की शर्त

सरकार की शर्त के मुताबिक, इन दोनों प्रदूषकों में कम से कम 20 फीसदी की कमी दर्ज होने पर ही संबंधित दिन का भुगतान किया जाएगा. एक स्वतंत्र एजेंसी मशीनों के आसपास और उससे दूर के इलाकों में हवा की गुणवत्ता की जांच करेगी. अगर कोई कंपनी लगातार दो महीने तक तय लक्ष्य हासिल नहीं करती, तो नोटिस देने और उसका पक्ष सुनने के बाद उसका ठेका रद्द किया जा सकता है.

कनॉट प्लेस से चांदनी चौक तक होंगे शामिल

इस योजना में कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, खान मार्केट, डिफेंस कॉलोनी, अस्पतालों, बस अड्डों और दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस जैसे इलाके शामिल हैं. पर्यटन स्थलों और बाबा खड़क सिंह मार्ग पर भी काम किया जा सकता है. हर जगह करीब एक से डेढ़ एकड़ क्षेत्र में प्रदूषण कम करने के उपाय किए जाएंगे.

पहले भी लगाए गए एयर प्यूरीफायर

दिल्ली में पहले भी हवा साफ करने वाली मशीनों का इस्तेमाल करके देखा गया है. आनंद विहार बस टर्मिनल पर हुए एक परीक्षण में PM2.5 में 30 फीसदी और PM10 में 25 फीसदी तक कमी दर्ज की गई थी. हालांकि, इसका असर मुख्य रूप से मशीनों के आसपास ही दिखाई दिया. कनॉट प्लेस में लगाए गए स्मॉग टावर का असर भी सीमित दूरी तक पाया गया. इसी वजह से नई योजना में किसी खास मशीन को अनिवार्य करने के बजाय कंपनियों को अलग-अलग तकनीक अपनाने का ऑप्शन दिया गया है.

कंपनियों के लिए भी तय हैं नियम

टेंडर में हिस्सा लेने वाली कंपनियों का औसत सालाना कारोबार कम से कम एक करोड़ रुपये होना चाहिए. उन्हें पहले किए गए समान कामों का अनुभव भी दिखाना होगा. चुनी गई कंपनी को तीन फीसदी की परफॉर्मेंस बैंक गारंटी देनी होगी. हर साइट के लिए पांच लाख रुपये की बोली सुरक्षा राशि भी तय की गई है.

ये भी पढ़ें: महिला को श्राप देने के आरोप पर भड़का युवक, मंदिर में पुजारी को जमीन पर गिराकर पीटा; वीडियो वायरल

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Delhi Pollution: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने नई योजना बनाई है. इसके तहत राजधानी के 40 ऐसे इलाकों में हवा साफ करने के लिए विशेष उपकरण लगाए जाएंगे, जहां प्रदूषण की समस्या ज्यादा है. इस काम पर करीब 104 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. खास बात यह है कि निजी कंपनियों को पैसा उनके काम के नतीजों के आधार पर मिलेगा.

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने इस योजना को 40 अलग-अलग हिस्सों में बांटा है. हर हिस्से के लिए करीब 2.6 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. कंपनियों को ऐसी तकनीक इस्तेमाल करनी होगी, जिससे हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 का स्तर कम हो सके.

सरकार की शर्त

सरकार की शर्त के मुताबिक, इन दोनों प्रदूषकों में कम से कम 20 फीसदी की कमी दर्ज होने पर ही संबंधित दिन का भुगतान किया जाएगा. एक स्वतंत्र एजेंसी मशीनों के आसपास और उससे दूर के इलाकों में हवा की गुणवत्ता की जांच करेगी. अगर कोई कंपनी लगातार दो महीने तक तय लक्ष्य हासिल नहीं करती, तो नोटिस देने और उसका पक्ष सुनने के बाद उसका ठेका रद्द किया जा सकता है.

कनॉट प्लेस से चांदनी चौक तक होंगे शामिल

इस योजना में कनॉट प्लेस, चांदनी चौक, खान मार्केट, डिफेंस कॉलोनी, अस्पतालों, बस अड्डों और दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस जैसे इलाके शामिल हैं. पर्यटन स्थलों और बाबा खड़क सिंह मार्ग पर भी काम किया जा सकता है. हर जगह करीब एक से डेढ़ एकड़ क्षेत्र में प्रदूषण कम करने के उपाय किए जाएंगे.

पहले भी लगाए गए एयर प्यूरीफायर

दिल्ली में पहले भी हवा साफ करने वाली मशीनों का इस्तेमाल करके देखा गया है. आनंद विहार बस टर्मिनल पर हुए एक परीक्षण में PM2.5 में 30 फीसदी और PM10 में 25 फीसदी तक कमी दर्ज की गई थी. हालांकि, इसका असर मुख्य रूप से मशीनों के आसपास ही दिखाई दिया. कनॉट प्लेस में लगाए गए स्मॉग टावर का असर भी सीमित दूरी तक पाया गया. इसी वजह से नई योजना में किसी खास मशीन को अनिवार्य करने के बजाय कंपनियों को अलग-अलग तकनीक अपनाने का ऑप्शन दिया गया है.

कंपनियों के लिए भी तय हैं नियम

टेंडर में हिस्सा लेने वाली कंपनियों का औसत सालाना कारोबार कम से कम एक करोड़ रुपये होना चाहिए. उन्हें पहले किए गए समान कामों का अनुभव भी दिखाना होगा. चुनी गई कंपनी को तीन फीसदी की परफॉर्मेंस बैंक गारंटी देनी होगी. हर साइट के लिए पांच लाख रुपये की बोली सुरक्षा राशि भी तय की गई है.

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