Delhi GRAP 1: दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है. पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि राजधानी की हवा को साफ रखने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार का जोर वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और प्रदूषण के दूसरे स्थानीय कारणों को कम करने पर है.
GRAP-1 लागू होने से क्या बदलेगा?
GRAP-1 के तहत प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी. होटल, रेस्तरां और खुले में भोजन बेचने वाली दुकानों में तंदूर जलाने के लिए कोयले और लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. इसके स्थान पर गैस, बिजली या दूसरे स्वच्छ ईंधन वाले विकल्प अपनाने होंगे. सामान्य बिजली आपूर्ति के दौरान डीजल जनरेटर चलाने पर भी रोक रहेगी. हालांकि, जरूरी सेवाओं और आपात परिस्थितियों में इनके इस्तेमाल की अनुमति नियमों के अनुसार दी जा सकती है.
पार्किंग शुल्क बढ़ा
सरकार ने पार्किंग शुल्क बढ़ाने का भी ऐलान किया है. मेट्रो की पार्किंग को छोड़कर दिल्ली में अन्य पार्किंग स्थलों पर लोगों को पहले के मुकाबले दोगुना शुल्क देना पड़ सकता है. इसके अलावा, एक नवंबर से वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना आने वाले वाहनों को पेट्रोल-डीजल नहीं देने की व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है.
निर्माण कार्यों और धूल पर रहेगी नजर
मंत्री के मुताबिक, खुले में कचरा और दूसरी चीजें जलाने पर रोक लगाई गई है. खुले में तोड़फोड़ से जुड़े काम 30 नवंबर तक बंद रखने की बात भी कही गई है. धूल कम करने के लिए राजधानी में 608 एंटी-स्मॉग गन और 1,150 मिस्ट स्प्रे यूनिट लगाए गए हैं. निर्माण स्थलों पर नियमों के पालन की निगरानी के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया गया है.
सरकार का 11 सूत्रीय एक्शन प्लान
सिरसा ने बताया कि प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार 11 सूत्रीय योजना पर काम कर रही है. इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, ट्रैफिक प्रबंधन सुधारना और प्रदूषण वाले इलाकों की पहचान करना शामिल है. IIT मद्रास की मदद से स्थानीय प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाया जा रहा है. वहीं, AI आधारित ट्रैफिक व्यवस्था से वाहनों की आवाजाही बेहतर करने की कोशिश की जा रही है.
वर्क फ्रॉम होम की अपील
सरकार ने कार्यालयों के कामकाजी समय में बदलाव और वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्पों पर भी जोर दिया है. ऐसा करने से सड़कों पर गाड़ियों का दबाव घट सकेगा. IIT कानपुर के सहयोग से क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है. साथ ही उन्होंने दिल्लीवासियों से निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करने, कारपूलिंग अपनाने और खुले में कुछ भी जलाने से बचने की अपील की. उनका कहना है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है.