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Nakli Krishna Kon Tha: कौन था वो ‘नकली कृष्ण’? मोरपंख से लेकर सुदर्शन चक्र तक…फिर असली कृष्ण को ललकारा; फिर हुआ ऐसा अंत

Nakli Krishna Kon Tha: पौंड्रक ने खुद को असली वासुदेव बताकर श्रीकृष्ण की नकल शुरू कर दी. चाटुकारों के बहकावे में उसने कृष्ण जैसी वेशभूषा और दिव्य चिह्न अपनाकर लोगों को भ्रमित किया.

Written By:
Edited By: Uttam Ojha
Last Updated: 2026-09-04 14:05:33

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Nakli Krishna Kon Tha: भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. द्वापर युग में देवकी और वसुदेव के घर जन्मे श्रीकृष्ण अपनी बुद्धि, पराक्रम और दिव्य शक्तियों के लिए जाने जाते हैं. उनके पास सुदर्शन चक्र, पांचजन्य शंख और कौस्तुभ मणि जैसे दिव्य अस्त्र और आभूषण थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि महाभारत काल में एक राजा ऐसा भी था, जिसने खुद को असली कृष्ण यानी वासुदेव बताना शुरू कर दिया था? 

कौन था वो ‘नकली कृष्ण’?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, उस राजा का नाम पौंड्रक था. उसके पिता का नाम भी वसुदेव बताया जाता है. इसी बात को आधार बनाकर पौंड्रक ने खुद को ‘वासुदेव’ और असली कृष्ण बताना शुरू कर दिया. उसके आसपास रहने वाले चाटुकारों ने भी उसकी गलतफहमी दूर करने के बजाय उसे और बढ़ाया. वे लगातार उसे यकीन दिलाते रहे कि वही असली वासुदेव है.

कृष्ण जैसा बनाया अपना हुलिया

धीरे-धीरे पौंड्रक ने भगवान श्रीकृष्ण की नकल करना शुरू कर दिया. उसने मोरपंख लगाया, पीतांबर पहना और श्रीकृष्ण जैसे चिह्न अपने साथ रखने लगा. कथाओं में यह भी कहा गया है कि उसने सुदर्शन चक्र और कौस्तुभ मणि की नकली प्रतियां तक बनवा ली थीं. अब वह अपने राज्य में खुद को असली कृष्ण बताकर लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने लगा.

श्रीकृष्ण को भेज दी युद्ध की चुनौती

पौंड्रक का अहंकार यहीं नहीं रुका. उसने भगवान श्रीकृष्ण के पास संदेश भेजकर कहा कि वे खुद को वासुदेव बताना बंद करें और उनके जैसे चिह्नों का इस्तेमाल भी छोड़ दें. उसने श्रीकृष्ण के सामने दो विकल्प रखे. या तो वे अपने दिव्य चिह्न छोड़ दें या फिर युद्ध के लिए तैयार रहें. श्रीकृष्ण ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली.

ये भी पढ़ें: Stock Market Today: 4 दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में तूफानी वापसी, Sensex 722 अंक उछला; Nifty फिर 24000 के पार

मैदान में हुआ असली और नकली कृष्ण का सामना

युद्ध के मैदान में दोनों आमने-सामने आए. पौंड्रक ने श्रीकृष्ण जैसा ही रूप बना रखा था, लेकिन सिर्फ कपड़े और चिह्नों की नकल से कोई भगवान नहीं बन सकता. युद्ध शुरू हुआ तो पौंड्रक की सारी अकड़ धीरे-धीरे खत्म होने लगी. आखिरकार श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया.

ये भी पढ़ें: Mumtaz के एक सुपरहिट गाने ने बदल दिया साड़ी पहनने का अंदाज, 57 साल बाद भी कायम है जादू

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Last Updated: 2026-09-04 14:05:33

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Nakli Krishna Kon Tha: भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. द्वापर युग में देवकी और वसुदेव के घर जन्मे श्रीकृष्ण अपनी बुद्धि, पराक्रम और दिव्य शक्तियों के लिए जाने जाते हैं. उनके पास सुदर्शन चक्र, पांचजन्य शंख और कौस्तुभ मणि जैसे दिव्य अस्त्र और आभूषण थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि महाभारत काल में एक राजा ऐसा भी था, जिसने खुद को असली कृष्ण यानी वासुदेव बताना शुरू कर दिया था? 

कौन था वो ‘नकली कृष्ण’?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, उस राजा का नाम पौंड्रक था. उसके पिता का नाम भी वसुदेव बताया जाता है. इसी बात को आधार बनाकर पौंड्रक ने खुद को ‘वासुदेव’ और असली कृष्ण बताना शुरू कर दिया. उसके आसपास रहने वाले चाटुकारों ने भी उसकी गलतफहमी दूर करने के बजाय उसे और बढ़ाया. वे लगातार उसे यकीन दिलाते रहे कि वही असली वासुदेव है.

कृष्ण जैसा बनाया अपना हुलिया

धीरे-धीरे पौंड्रक ने भगवान श्रीकृष्ण की नकल करना शुरू कर दिया. उसने मोरपंख लगाया, पीतांबर पहना और श्रीकृष्ण जैसे चिह्न अपने साथ रखने लगा. कथाओं में यह भी कहा गया है कि उसने सुदर्शन चक्र और कौस्तुभ मणि की नकली प्रतियां तक बनवा ली थीं. अब वह अपने राज्य में खुद को असली कृष्ण बताकर लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने लगा.

श्रीकृष्ण को भेज दी युद्ध की चुनौती

पौंड्रक का अहंकार यहीं नहीं रुका. उसने भगवान श्रीकृष्ण के पास संदेश भेजकर कहा कि वे खुद को वासुदेव बताना बंद करें और उनके जैसे चिह्नों का इस्तेमाल भी छोड़ दें. उसने श्रीकृष्ण के सामने दो विकल्प रखे. या तो वे अपने दिव्य चिह्न छोड़ दें या फिर युद्ध के लिए तैयार रहें. श्रीकृष्ण ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली.

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मैदान में हुआ असली और नकली कृष्ण का सामना

युद्ध के मैदान में दोनों आमने-सामने आए. पौंड्रक ने श्रीकृष्ण जैसा ही रूप बना रखा था, लेकिन सिर्फ कपड़े और चिह्नों की नकल से कोई भगवान नहीं बन सकता. युद्ध शुरू हुआ तो पौंड्रक की सारी अकड़ धीरे-धीरे खत्म होने लगी. आखिरकार श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया.

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