Saharanpur Mosque: सहारनपुर में सरकारी जमीन पर बने एक अनधिकृत मस्जिदनुमा ढांचे को प्रशासन द्वारा हटाए जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक स्थलों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को सहारनपुर की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए इसे एक ऐतिहासिक इस्लामिक धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई बताया. वहीं, भारतीय प्रशासन का कहना है कि ढांचा सरकारी जमीन पर अनधिकृत कब्जे के तहत बना था और उसे अदालत के आदेश के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाया गया.
सहारनपुर की कार्रवाई पर पाकिस्तान ने जताई आपत्ति
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय अधिकारियों पर धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया. पाकिस्तान ने दावा किया कि यह कार्रवाई इस्लामी विरासत को मिटाने के किसी व्यापक अभियान का हिस्सा है. पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी मामले पर ध्यान देने की अपील की और भारतीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की.
सरकारी जमीन पर कब्जे का था मामला
सहारनपुर में जिस ढांचे को प्रशासन ने हटाया, उसे लेकर अधिकारियों का कहना है कि निर्माण सरकारी संपत्ति पर अनधिकृत तरीके से किया गया था. जुलाई में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद इसे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की श्रेणी में माना था और ढांचा हटाने का आदेश दिया था. मस्जिद प्रबंधन ने इस फैसले को चुनौती देते हुए जिला जज की अदालत का दरवाजा खटखटाया था. हालांकि, जिला जज की अदालत ने अपील खारिज कर दी. इसके बाद प्रशासन ने शनिवार को कार्रवाई करते हुए ढांचे को ध्वस्त कर दिया.
भारत में भी उठे सवाल
सहारनपुर की कार्रवाई को लेकर भारत में विपक्ष के कुछ नेताओं और मुस्लिम संगठनों ने भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कार्रवाई के तरीके और समय को लेकर आपत्ति जताई है. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि पूरा कदम न्यायिक आदेश के आधार पर और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया गया. यानी प्रशासन की ओर से इसे धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई के बजाय सरकारी जमीन से अनधिकृत कब्जा हटाने की कार्रवाई बताया गया है.
चार दिन पहले पाकिस्तान के मंदिर पर भारत ने जताया था विरोध
पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब कुछ दिन पहले ही भारत ने पाकिस्तान के नारोवाल इलाके में एक हिंदू मंदिर को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई थी. भारत ने पाकिस्तान से मामले की तत्काल जांच कराने और कथित रूप से क्षतिग्रस्त मंदिर को बहाल करने के लिए कदम उठाने की मांग की थी. नई दिल्ली ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि वह अपने यहां रहने वाले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के साथ उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की भी रक्षा करे.
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर फिर आमने-सामने भारत-पाक
सहारनपुर की कार्रवाई पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और उससे कुछ दिन पहले पाकिस्तान में मंदिर को लेकर भारत की आपत्ति ने दोनों देशों के बीच धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है. एक तरफ भारत सहारनपुर मामले में अदालत के आदेश और सरकारी जमीन से अनधिकृत कब्जा हटाने की बात कर रहा है, वहीं पाकिस्तान इसे धार्मिक स्थल से जुड़ा मामला बता रहा है. ऐसे में दोनों देशों के बीच धार्मिक विरासत और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर बयानबाजी तेज होती दिख रही है.