Live TV
Search
Home > देश > 2 साल तक FIR नहीं… हिरासत में श्रवण की मौत पर Supreme Court ने उठाए सवाल, CBI जांच के साथ दिए ये आदेश

2 साल तक FIR नहीं… हिरासत में श्रवण की मौत पर Supreme Court ने उठाए सवाल, CBI जांच के साथ दिए ये आदेश

Supreme Court: छत्तीसगढ़ में 34 साल के एक व्यक्ति श्रवण की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दो साल तक FIR दर्ज न होने को लेकर सवाल उठाया. साथ ही 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है.

Written By:
Last Updated: August 12, 2026 12:33:12 IST

Mobile Ads 1x1

Supreme Court: छत्तीसगढ़ में 34 साल के एक व्यक्ति श्रवण की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी. इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को इस मामले की जांच सौंप दी है. कोर्ट ने इस बात को लेकर भी सवाल उठाया कि आखिर मौत के दो साल से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी राज्य पुलिस ने FIR दर्ज क्यों नहीं की थी. 

जानकारी के अनुसार, जनवरी 2024 में पुलिस कस्टडी में श्रवण की मौत हो गई थी. इसके बावजूद पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की. पुलिस ने 30 जुलाई 2026 को FIR दर्ज की. सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कस्टडी में हुई हिंसा के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज न करने में हुई इतनी देरी पर सवाल उठाए थे.

CBI को सौंपी गई जांच

कोर्ट ने आज आदेश देते हुए कहा, ‘मामले के तथ्यों और हालात को देखते हुए, हमारा पक्का मानना ​​है कि न्याय के हित में यह ज़रूरी है कि श्रवण की कस्टडी में हुई मौत के कारणों की जांच CBI को सौंपी जाए. साथ ही जांच पूरी होने पर कस्टडी में हिंसा के लिए ज़िम्मेदार पाए गए सभी अधिकारियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई और मुकदमा चलाया जाए.’

सिर में चोट लगने के कारण हुई मौत

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह भी आदेश दिया कि CBI उन राज्य अधिकारियों के आचरण की भी जांच की, जिन्हें ये पता था कि कस्टडी के दौरान सिर में लगी चोट के कारण श्रवण की मौत हुई है. इसके बाद भी उन्होंने न्यायिक जांच के बाद भी उचित कदम नहीं उठाए. कोर्ट ने सीबीआई को जांच सौंपते समय आदेश दिया कि कस्टडी में हुई मौत के मामले में रेगुलर क्रिमिनल केस दर्ज करने और जांच किसी सीनियर अधिकारी को सौंपी जाए. कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच तेज़ी से की जाए और जांच अधिकारी की रिपोर्ट अगली सुनवाई की तारीख, 13 अक्टूबर 2026 को कोर्ट के सामने पेश की जाए.

25 लाख रुपये के मुआवजे का एलान

कोर्ट ने राज्य को याचिकाकर्ताओं को अंतरिम मुआवज़े के तौर पर 25 लाख रुपये देने का भी निर्देश दिया. हालांकि मुआवज़े की अंतिम राशि मृतक के परिवार वालों की ओर से दायर मौजूदा रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान तय की जाएगी. कोर्ट ने कहा कि मृतक परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और राज्य की कस्टडी के दौरान हुई हिंसा की वजह से उसकी अप्राकृतिक मौत हुई. छत्तीसगढ़ राज्य ने इस बात पर कोई आपत्ति नहीं जताई है. इसके कारण हम अंतरिम उपाय के तौर पर निर्देश देते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य याचिकाकर्ताओं को 25,00,000 रुपये का मुआवज़ा दे. 

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, 18 जनवरी 2024 को श्रवण को कस्टडी में लिया गया था. उसे अपनी किराने की दुकान के सामने बिक्री के लिए शराब रखने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. 21 जनवरी 2024 को अस्पताल में उसकी मौत हुई. उसकी मौत के बाद, जेल सुपरिटेंडेंट ने 22 जनवरी 2024 को सेशन जज को पत्र लिखकर न्यायिक जांच की मांग की. इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई. जांच में सामने आया कि किसी कुंद हथियार से सिर पर लगी चोट के कारण उसकी मौत हुई. 

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में क्या हुआ?

इसके बाद मृतक की पत्नी और दो बेटियों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का रुख किया और उसकी मौत की निष्पक्ष जांच के साथ ही 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की. हालांकि, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने FIR दर्ज करने या आरोपों की जांच का आदेश दिए बिना 1 लाख रुपये का मुआवज़ा देकर याचिका का निपटारा कर दिया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 1 लाख रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए परिवार के नुकसान को गंभीरता से समझते हुए 25 लाख रुपये के मुआवजे का एलान किया है.

छत्तीसगढ़ DGP को दिए निर्देश

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि मामले का पूरा रिकॉर्ड एक हफ़्ते के अंदर एक विशेष मैसेंजर के ज़रिए CBI डायरेक्टर को भेजा जाए. याचिकाकर्ता के बैंक खाते में चार हफ़्ते के अंदर अंतरिम मुआवजा जमा करने का भी आदेश दिया गया है.

MORE NEWS

Home > देश > 2 साल तक FIR नहीं… हिरासत में श्रवण की मौत पर Supreme Court ने उठाए सवाल, CBI जांच के साथ दिए ये आदेश

Written By:
Last Updated: August 12, 2026 12:33:12 IST

Mobile Ads 1x1

Supreme Court: छत्तीसगढ़ में 34 साल के एक व्यक्ति श्रवण की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी. इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को इस मामले की जांच सौंप दी है. कोर्ट ने इस बात को लेकर भी सवाल उठाया कि आखिर मौत के दो साल से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी राज्य पुलिस ने FIR दर्ज क्यों नहीं की थी. 

जानकारी के अनुसार, जनवरी 2024 में पुलिस कस्टडी में श्रवण की मौत हो गई थी. इसके बावजूद पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की. पुलिस ने 30 जुलाई 2026 को FIR दर्ज की. सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कस्टडी में हुई हिंसा के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज न करने में हुई इतनी देरी पर सवाल उठाए थे.

CBI को सौंपी गई जांच

कोर्ट ने आज आदेश देते हुए कहा, ‘मामले के तथ्यों और हालात को देखते हुए, हमारा पक्का मानना ​​है कि न्याय के हित में यह ज़रूरी है कि श्रवण की कस्टडी में हुई मौत के कारणों की जांच CBI को सौंपी जाए. साथ ही जांच पूरी होने पर कस्टडी में हिंसा के लिए ज़िम्मेदार पाए गए सभी अधिकारियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई और मुकदमा चलाया जाए.’

सिर में चोट लगने के कारण हुई मौत

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह भी आदेश दिया कि CBI उन राज्य अधिकारियों के आचरण की भी जांच की, जिन्हें ये पता था कि कस्टडी के दौरान सिर में लगी चोट के कारण श्रवण की मौत हुई है. इसके बाद भी उन्होंने न्यायिक जांच के बाद भी उचित कदम नहीं उठाए. कोर्ट ने सीबीआई को जांच सौंपते समय आदेश दिया कि कस्टडी में हुई मौत के मामले में रेगुलर क्रिमिनल केस दर्ज करने और जांच किसी सीनियर अधिकारी को सौंपी जाए. कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच तेज़ी से की जाए और जांच अधिकारी की रिपोर्ट अगली सुनवाई की तारीख, 13 अक्टूबर 2026 को कोर्ट के सामने पेश की जाए.

25 लाख रुपये के मुआवजे का एलान

कोर्ट ने राज्य को याचिकाकर्ताओं को अंतरिम मुआवज़े के तौर पर 25 लाख रुपये देने का भी निर्देश दिया. हालांकि मुआवज़े की अंतिम राशि मृतक के परिवार वालों की ओर से दायर मौजूदा रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान तय की जाएगी. कोर्ट ने कहा कि मृतक परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और राज्य की कस्टडी के दौरान हुई हिंसा की वजह से उसकी अप्राकृतिक मौत हुई. छत्तीसगढ़ राज्य ने इस बात पर कोई आपत्ति नहीं जताई है. इसके कारण हम अंतरिम उपाय के तौर पर निर्देश देते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य याचिकाकर्ताओं को 25,00,000 रुपये का मुआवज़ा दे. 

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, 18 जनवरी 2024 को श्रवण को कस्टडी में लिया गया था. उसे अपनी किराने की दुकान के सामने बिक्री के लिए शराब रखने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. 21 जनवरी 2024 को अस्पताल में उसकी मौत हुई. उसकी मौत के बाद, जेल सुपरिटेंडेंट ने 22 जनवरी 2024 को सेशन जज को पत्र लिखकर न्यायिक जांच की मांग की. इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई. जांच में सामने आया कि किसी कुंद हथियार से सिर पर लगी चोट के कारण उसकी मौत हुई. 

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में क्या हुआ?

इसके बाद मृतक की पत्नी और दो बेटियों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का रुख किया और उसकी मौत की निष्पक्ष जांच के साथ ही 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की. हालांकि, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने FIR दर्ज करने या आरोपों की जांच का आदेश दिए बिना 1 लाख रुपये का मुआवज़ा देकर याचिका का निपटारा कर दिया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 1 लाख रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए परिवार के नुकसान को गंभीरता से समझते हुए 25 लाख रुपये के मुआवजे का एलान किया है.

छत्तीसगढ़ DGP को दिए निर्देश

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि मामले का पूरा रिकॉर्ड एक हफ़्ते के अंदर एक विशेष मैसेंजर के ज़रिए CBI डायरेक्टर को भेजा जाए. याचिकाकर्ता के बैंक खाते में चार हफ़्ते के अंदर अंतरिम मुआवजा जमा करने का भी आदेश दिया गया है.

MORE NEWS