पिता का कारोबार संभालने से लेकर ‘मुल्क’ तक… ऐसे बने मनोज पाहवा, कॉमेडी से गंभीर किरदारों में बनाई पहचान
Manoj Pahwa: मनोज पाहवा आज हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में गिने जाते हैं, जो पर्दे पर आते ही कहानी में अपनी अलग जगह बना लेते हैं. कभी ‘ऑफिस ऑफिस’ के भाटिया जी बनकर उन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया तो कभी ‘मुल्क’ और ‘आर्टिकल 15’ जैसी फिल्मों में गंभीर किरदार निभाए. इस मुकाम तक पहुंचने की उनकी कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. एक वक्त ऐसा भी था, जब उन्हें अपने पिता का कारोबार संभालना पड़ा. दिल्ली में उनके पिता ऑटोमोबाइल बैटरी और पार्ट्स का कारोबार करते थे और चाहते थे कि बेटा भी आगे चलकर इसी काम को संभाले. पिता के निधन के बाद मनोज ने कुछ समय तक परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं. उन्होंने अपनी दोनों बहनों की शादी कराई और फिर कारोबार की जिम्मेदारी छोटे भाई को सौंप दी और अपने सपने की तरफ लौट आए.
रामलीला में बने लक्ष्मण
मनोज को बचपन से ही एक्टिंग का शौक था. स्थानीय रामलीला में उन्होंने लक्ष्मण का किरदार निभाया. शायद वह उनके अभिनय करियर का पहला ऐसा मौका था, जब उन्हें अपने काम के लिए पहचान मिली. दिल्ली का मंडी हाउस उनके जीवन का अगला बड़ा पड़ाव बना. थिएटर ने उनकी एक्टिंग की नींव मजबूत की और यही अनुभव आगे चलकर उनके फिल्मी सफर में भी काम आया.
थिएटर में ही मिली जीवनसाथी
थिएटर में एक्टिंग के सफर में उनकी मुलाकात एक्ट्रेस सीमा पाहवा से हुई. दोनों ने कम उम्र में साथ थिएटर किया और बाद में शादी कर ली. दोनों का रिश्ता सिर्फ निजी जिंदगी तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने संघर्ष और करियर का लंबा सफर भी साथ तय किया. जब मुंबई में किस्मत आजमाने का फैसला किया, तो दोनों ने वहां के संघर्ष को भी साथ झेला. शुरुआती दिनों में परिवार के साथ 1BHK घर में रहना पड़ा.
विज्ञापनों ने दिया सहारा
लगभग 1994 के आसपास मनोज और सीमा परिवार के साथ मुंबई पहुंचे. मुंबई की फिल्मी दुनिया दूर से जितनी चमकदार दिखाई देती है, उसके पीछे का संघर्ष उतना ही कठिन होता है. मनोज को भी शुरुआत में तुरंत बड़े रोल नहीं मिले. इस दौरान विज्ञापन उनके लिए बड़ा सहारा बने. उन्होंने लगभग 200 विज्ञापनों में काम किया, इनमें मैगी सॉस का विज्ञापन भी शामिल था. एक विज्ञापन में उन्होंने पाकिस्तानी सेना के अधिकारी की भूमिका निभाई थी. इसी विज्ञापन ने उनके लिए बॉलीवुड का एक अहम दरवाजा खोल दिया. बताया जाता है कि उनके उस काम को देखकर कमल हासन ने उन्हें अपनी फिल्म 'हे राम' में मौका दिया. यह उनके फिल्मी सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव था.
'ऑफिस ऑफिस' से घर-घर में मिली पहचान
इसके बाद मनोज पाहवा ने फिल्मों और टीवी में लगातार काम किया लेकिन उनकी सबसे यादगार पहचान बनी 'ऑफिस ऑफिस' के भाटिया जी के किरदार से. भाटिया जी का किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि मनोज पाहवा को देशभर में पहचान मिलने लगी. उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवाद बोलने का अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया. हालांकि इस रोल के हाद लंबे समय तक उन्हें कॉमेडी और सपोर्टिंग रोल्स के लिए ही देखा जाने लगा. ऐसे में मनोज ने तय किया कि वह सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं रहेंगे.
नसीरुद्दीन शाह ने दोबारा थिएटर से जोड़ा
फिल्मों और टीवी की व्यस्तता के बीच मनोज थिएटर से दूर हो गए थे. इसी दौरान नसीरुद्दीन शाह ने उन्हें दोबारा थिएटर की तरफ लौटने के लिए प्रेरित किया. थिएटर में वापस आने के बाद उनकी एक्टिंग को लेकर सोच और गहरी हुई. मनोज पाहवा के करियर में साल 2018 की फिल्म 'मुल्क' को एक बड़े टर्निंग पॉइंट के तौर पर देखा जाता है. लंबे समय तक कॉमेडी और सपोर्टिंग भूमिकाओं में नजर आने वाले मनोज ने इस फिल्म में गंभीर और संवेदनशील किरदार निभाया.
मुल्क से बदली किस्मत
'मुल्क' के बाद दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री ने उनकी एक्टिंग का एक नया पक्ष देखा. इसके बाद 'आर्टिकल 15' और 'रामप्रसाद की तेहरवीं' जैसी फिल्मों में भी उनके काम को सराहा गया. मनोज ने भी कई मौकों पर 'मुल्क' को अपने करियर में नए दरवाजे खोलने वाली फिल्म बताया है. अब वह सिर्फ भाटिया जी वाले कॉमेडियन नहीं थे बल्कि एक ऐसे अभिनेता के तौर पर पहचाने जाने लगे थे, जो गंभीर किरदारों को भी उतनी ही मजबूती से निभा सकता है.