भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने अपने बचपन का एक ऐसा भावुक किस्सा साझा किया है, जिसने उनके पूरे क्रिकेट करियर की दिशा बदल दी. उन्होंने बताया कि छोटी उम्र में उनके पिता ने उन्हें जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता का महत्व सिखाया. यही सीख आगे चलकर उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी. रहाणे ने कहा कि आज भी जब वह मैदान पर उतरते हैं तो उन्हें अपने माता-पिता का संघर्ष और त्याग याद आता है.
रहाणे ने बताया कि जब वह केवल सात साल के थे, तब मुंबई में क्रिकेट प्रैक्टिस के लिए लोकल ट्रेन से सफर करते थे. पहले दिन उनके पिता उन्हें स्टेशन तक छोड़ने गए. इसके लिए उन्हें अपनी नौकरी से छुट्टी लेनी पड़ी और उस दिन उन्हें वेतन भी नहीं मिला. अगले ही दिन उनके पिता ने उनसे कहा कि अब उन्हें अकेले ही ट्रेन से सफर करना होगा. छोटी उम्र में भारी क्रिकेट किट बैग लेकर भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन में यात्रा करना आसान नहीं था, लेकिन इसी अनुभव ने उन्हें मजबूत और आत्मविश्वासी बनाया.
पिता का अनकहा त्याग बना सबसे बड़ी प्रेरणा
रहाणे ने बताया कि कई साल बाद उनके पिता ने उन्हें एक ऐसी सच्चाई बताई, जिसे सुनकर वह भावुक हो गए. उनके पिता ने बताया कि जिस दिन उन्होंने रहाणे को अकेले भेजा था, उस दिन वह खुद दूसरी बोगी में बैठकर पूरे रास्ते उनका पीछा कर रहे थे. वह सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि उनका बेटा सुरक्षित तरीके से रेलवे स्टेशन तक पहुंच जाए. उस समय उन्होंने यह बात अपने बेटे को नहीं बताई, ताकि उसका आत्मविश्वास बना रहे.
माता-पिता के लिए खेलने का लिया संकल्प
इस घटना ने अजिंक्य रहाणे की सोच पूरी तरह बदल दी. उन्होंने कहा कि उसी दिन उन्होंने तय कर लिया था कि वह चाहे मुंबई के लिए खेलें या भारत के लिए, हर मुकाबला अपने माता-पिता को समर्पित करेंगे. रहाणे के अनुसार, उनके पिता का यह निस्वार्थ त्याग और भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना. यही प्रेरणा उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का हौसला देती रही और भारतीय क्रिकेट में सफलता हासिल करने का आधार बनी.