Delhi Gangrape Case: महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ घटनाएं समाज के सामने कड़वे सवाल खड़े कर देती हैं. आखिर किसी लड़की को सिर्फ इसलिए डर और हिंसा का सामना क्यों करना पड़े क्योंकि वह अकेले सफर कर रही है? ऐसी घटनाएं सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल नहीं उठातीं, बल्कि उन लोगों की सोच पर भी कटाक्ष करती हैं जो महिलाओं को इंसान नहीं, बल्कि अपनी हवस का शिकार समझते हैं. दिल्ली में नाबालिग के साथ स्लीपर बस में कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला भी ऐसा ही है, जिसमें पुलिस ने अब 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है.
ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के सफर में हुआ अपराध
पुलिस के अनुसार, घटना 4 अगस्त की रात की है. उत्तर प्रदेश की रहने वाली नाबालिग ग्रेटर नोएडा से बस में इस सोच के साथ सवार हुई थी कि बस नोएडा सेक्टर-63 की तरफ जाएगी. बस में बैठने के बाद उसे पता चला कि उसमें कोई दूसरा यात्री नहीं था. इसके बाद उसने बस से उतरने की कोशिश की. आरोप है कि परिचालक ने उसे उतरने नहीं दिया और बस का दरवाजा बंद कर दिया. इसके बाद बस दिल्ली की ओर बढ़ी. पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान नाबालिग के साथ बस के अंदर कथित सामूहिक दुष्कर्म किया गया. बाद में उसे कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास उतार दिया गया, जहां उसने पुलिस से शिकायत की.
कुछ ही घंटों में पकड़े गए आरोपी
शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की. पुलिस की कई टीमों ने इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और बस की तलाश शुरू की. पुलिस के मुताबिक, कुछ ही घंटों में बस का पता तिमारपुर के एक पार्किंग क्षेत्र में लगा लिया गया. इसके बाद बस चालक कुलदीप और परिचालक संदीप को गिरफ्तार किया गया.
398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल
पुलिस ने इस मामले में 398 पन्नों का आरोपपत्र 18 सितंबर को दिल्ली की एक अदालत में दाखिल किया. अदालत ने 24 सितंबर को चार्जशीट का संज्ञान लिया. आरोपपत्र में पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों और अन्य लोगों समेत 10 लोगों को गवाह बनाया गया है. मामले की जांच में बस से मिले साक्ष्यों को भी अहम माना गया है.
बस की फॉरेंसिक जांच में मिले जैविक साक्ष्य
पुलिस के अनुसार, बस की फॉरेंसिक जांच के दौरान जैविक साक्ष्य बरामद किए गए. इन्हें आगे की जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया. जांच में बस से जुड़ी कुछ सुरक्षा और नियामक खामियां भी सामने आने की बात पुलिस ने कही है. ये खामियां सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों, खासकर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.
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फिर ताजा हुई निर्भया कांड की याद
इस घटना ने 2012 के निर्भया कांड की यादें भी ताजा कर दीं. उस मामले में 23 साल फिजियोथेरेपी इंटर्न के साथ चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और बाद में उसे सड़क पर फेंक दिया गया था. स्लीपर बस में नाबालिग से जुड़े इस मामले का जिक्र सुप्रीम कोर्ट में भी हुआ. कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के खिलाफ अपराध से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कानून-व्यवस्था की व्यवस्था पर सवाल उठाए.
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