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Home > देश > सरकार ने एनर्जी ड्रिंक्स पर कसा शिकंजा! Sting और Red Bull समेत बड़ी कंपनियों को मिला आदेश

सरकार ने एनर्जी ड्रिंक्स पर कसा शिकंजा! Sting और Red Bull समेत बड़ी कंपनियों को मिला आदेश

Energy Drink: FSSAI का कहना है कि भारत में अभी तक एनर्जी ड्रिंक्स के लिए कोई ऑफिशियल कैटेगरी तय नहीं की गई है. इसलिए, किसी ड्रिंक को "एनर्जी ड्रिंक" कहना या यह दावा करना कि यह शरीर और दिमाग को तुरंत एनर्जी देता है या कमजोरी दूर करता है, कंज्यूमर्स को गुमराह कर सकता है.

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Last Updated: July 27, 2026 19:41:14 IST

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Energy Drink: अगर आप पेप्सी स्टिंग, रेड बुल, मॉन्स्टर, कैम्पा एनर्जी, या हेल एनर्जी जैसे ड्रिंक्स पीते हैं, तो जल्द ही आपको उनकी बोतलों पर “एनर्जी ड्रिंक” लिखा हुआ नहीं दिखेगा. भारत सरकार ने इन कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स से “एनर्जी ड्रिंक” या ऐसे ही दूसरे शब्द हटाने का आदेश दिया है. यह फैसला फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने लिया है.

FSSAI का कहना है कि भारत में अभी तक एनर्जी ड्रिंक्स के लिए कोई ऑफिशियल कैटेगरी तय नहीं की गई है. इसलिए, किसी ड्रिंक को “एनर्जी ड्रिंक” कहना या यह दावा करना कि यह शरीर और दिमाग को तुरंत एनर्जी देता है या कमजोरी दूर करता है, कंज्यूमर्स को गुमराह कर सकता है.

कौन सी कंपनियों पर असर पड़ेगा?

इस फैसले का असर पेप्सी, रेड बुल, मॉन्स्टर बेवरेजेज, कैम्पा एनर्जी, और हेल एनर्जी जैसी बड़ी कंपनियों पर पड़ेगा. इन सभी कंपनियों को अपनी पैकेजिंग और लेबलिंग बदलनी होगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियों ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि “एनर्जी ड्रिंक” शब्द हटाने से उनके ब्रांड की पहचान और बिक्री पर असर पड़ेगा. हाल ही में एक बंद कमरे में हुई मीटिंग में, FSSAI ने साफ किया कि अगर कंपनियों को कोई एतराज़ है तो वे कोर्ट जा सकती हैं. हालांकि, इंडस्ट्री सोर्स के मुताबिक, बाद में कंपनियां नियमों को मानने के लिए मान गईं और उन्हें अपने लेबल बदलने के लिए 90 दिन का समय दिया गया.

यह फैसला क्यों लिया गया?

दुनिया भर के कई देशों में हाई-कैफीन ड्रिंक्स को लेकर पहले से ही चिंता जताई जा रही है. इनमें कैफीन, चीनी और टॉरिन की मात्रा ज़्यादा होती है. इसी वजह से, इंग्लैंड ने अगले साल अप्रैल से 16 साल से कम उम्र के बच्चों को हाई-कैफीन एनर्जी ड्रिंक्स बेचने पर रोक लगाने का फैसला किया है. हाल के सालों में भारत में एनर्जी ड्रिंक का मार्केट तेज़ी से बढ़ा है. खास तौर पर पेप्सी स्टिंग को 2017 में लॉन्च होने के बाद काफी पॉपुलैरिटी मिली. सिर्फ़ ₹20 की कीमत वाली स्टिंग की बोतलें 15 से 19 साल के युवाओं और ग्रामीण इलाकों में खास तौर पर पॉपुलर हैं.

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Energy Drink: अगर आप पेप्सी स्टिंग, रेड बुल, मॉन्स्टर, कैम्पा एनर्जी, या हेल एनर्जी जैसे ड्रिंक्स पीते हैं, तो जल्द ही आपको उनकी बोतलों पर “एनर्जी ड्रिंक” लिखा हुआ नहीं दिखेगा. भारत सरकार ने इन कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स से “एनर्जी ड्रिंक” या ऐसे ही दूसरे शब्द हटाने का आदेश दिया है. यह फैसला फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने लिया है.

FSSAI का कहना है कि भारत में अभी तक एनर्जी ड्रिंक्स के लिए कोई ऑफिशियल कैटेगरी तय नहीं की गई है. इसलिए, किसी ड्रिंक को “एनर्जी ड्रिंक” कहना या यह दावा करना कि यह शरीर और दिमाग को तुरंत एनर्जी देता है या कमजोरी दूर करता है, कंज्यूमर्स को गुमराह कर सकता है.

कौन सी कंपनियों पर असर पड़ेगा?

इस फैसले का असर पेप्सी, रेड बुल, मॉन्स्टर बेवरेजेज, कैम्पा एनर्जी, और हेल एनर्जी जैसी बड़ी कंपनियों पर पड़ेगा. इन सभी कंपनियों को अपनी पैकेजिंग और लेबलिंग बदलनी होगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियों ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि “एनर्जी ड्रिंक” शब्द हटाने से उनके ब्रांड की पहचान और बिक्री पर असर पड़ेगा. हाल ही में एक बंद कमरे में हुई मीटिंग में, FSSAI ने साफ किया कि अगर कंपनियों को कोई एतराज़ है तो वे कोर्ट जा सकती हैं. हालांकि, इंडस्ट्री सोर्स के मुताबिक, बाद में कंपनियां नियमों को मानने के लिए मान गईं और उन्हें अपने लेबल बदलने के लिए 90 दिन का समय दिया गया.

यह फैसला क्यों लिया गया?

दुनिया भर के कई देशों में हाई-कैफीन ड्रिंक्स को लेकर पहले से ही चिंता जताई जा रही है. इनमें कैफीन, चीनी और टॉरिन की मात्रा ज़्यादा होती है. इसी वजह से, इंग्लैंड ने अगले साल अप्रैल से 16 साल से कम उम्र के बच्चों को हाई-कैफीन एनर्जी ड्रिंक्स बेचने पर रोक लगाने का फैसला किया है. हाल के सालों में भारत में एनर्जी ड्रिंक का मार्केट तेज़ी से बढ़ा है. खास तौर पर पेप्सी स्टिंग को 2017 में लॉन्च होने के बाद काफी पॉपुलैरिटी मिली. सिर्फ़ ₹20 की कीमत वाली स्टिंग की बोतलें 15 से 19 साल के युवाओं और ग्रामीण इलाकों में खास तौर पर पॉपुलर हैं.

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