layoffs in tech companies: वैश्विक टेक इंडस्ट्री में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी का दौर देखने को मिल रहा है. कंपनियां जहां लागत कम करने और अपने कारोबार को अधिक कुशल बनाने पर जोर दे रही हैं, वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई में तेजी से निवेश भी किया जा रहा है. इसका सीधा असर टेक वर्कफोर्स पर पड़ता दिखाई दे रहा है. Layoffs.fyi के आंकड़ों के मुताबिक, महज 10 दिनों में दुनिया भर में 6,300 से ज्यादा टेक कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं.
2026 में अब तक करीब 1.3 लाख कर्मचारियों पर असर
टेक सेक्टर में हो रही ताजा छंटनी कोई अकेली घटना नहीं है. Layoffs.fyi के मुताबिक, 2026 में अब तक दुनियाभर में करीब 1.3 लाख टेक कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं. Amazon, Meta और Oracle जैसी बड़ी टेक कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या घटाने की दिशा में कदम उठा चुकी हैं. कंपनियों के फैसलों से संकेत मिल रहा है कि टेक इंडस्ट्री में अब केवल तेजी से भर्ती करने के बजाय उत्पादकता, लागत और निवेश पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है.
PayPal में भारत के करीब 220 कर्मचारियों पर असर
पेपाल ने भारत में अपने कर्मचारियों की संख्या में करीब 4 फीसदी कटौती करने की योजना बनाई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फैसले से चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद में काम करने वाले लगभग 220 कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं. छंटनी का असर टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, ऑपरेशंस, पेमेंट्स और फाइनेंस जैसे विभागों पर पड़ने की बात सामने आई है. भारत में टेक कंपनियों के बड़े कर्मचारी बेस को देखते हुए इस तरह के फैसले का असर बड़ी संख्या में प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है.
Uber ने भी घटाया वर्कफोर्स
उबर ने करीब 3,300 नौकरियों में कटौती करने की योजना बनाई है. यह कंपनी के वैश्विक कर्मचारियों का लगभग 10 फीसदी हिस्सा बताया जा रहा है. महामारी के बाद से यह कंपनी की बड़ी छंटनियों में से एक मानी जा रही है. उबर समेत कई कंपनियां अपने ऑपरेशनल खर्च को नियंत्रित करने और कारोबार की प्राथमिकताओं के अनुसार कर्मचारियों की संख्या में बदलाव कर रही हैं.
Zomato और Apple में भी नौकरियां गईं
टेक और डिजिटल सेक्टर की दूसरी कंपनियां भी अपने स्तर पर वर्कफोर्स कम कर रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Zomato और Apple ने मिलकर करीब 250 कर्मचारियों की छंटनी की है. वहीं Oracle में भी एक और दौर की छंटनी की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर दुनियाभर में हजारों कर्मचारियों पर पड़ सकता है.
क्या AI बन रही है नौकरियों में कटौती की वजह?
टेक कंपनियों में छंटनी की चर्चा के बीच एआई की बढ़ती भूमिका सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही है. कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन का इस्तेमाल उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ दोहराए जाने वाले और प्रशासनिक कामों को कम करने के लिए कर रही हैं. कई कंपनियां अपने संसाधनों को एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में शिफ्ट कर रही हैं. ऐसे में कुछ पारंपरिक या कम प्राथमिकता वाली भूमिकाओं की जरूरत पहले की तुलना में कम हो सकती है.
सिर्फ AI नहीं, कई वजहों से जा रही हैं नौकरियां
हालांकि, टेक सेक्टर में हो रही हर छंटनी को केवल एआई से जोड़ना सही नहीं होगा. कंपनियों की धीमी ग्रोथ, मुनाफा बढ़ाने का दबाव, महामारी के दौरान जरूरत से ज्यादा भर्ती, कारोबारी रणनीति में बदलाव और ऑपरेशन को सरल बनाने की कोशिश भी इसके पीछे बड़ी वजहें हैं. यानी कंपनियां एक तरफ खर्च घटा रही हैं तो दूसरी तरफ उन क्षेत्रों में पैसा और कर्मचारी लगा रही हैं, जिन्हें वे भविष्य के विकास के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण मानती हैं. इससे टेक इंडस्ट्री में नौकरियों का स्वरूप तेजी से बदलता नजर आ रहा है.
टेक कर्मचारियों के लिए बदल रहा है नौकरी का बाजार
एआई और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ टेक इंडस्ट्री में अब उन कर्मचारियों की मांग बढ़ सकती है, जिनके पास नई तकनीकों से जुड़ी विशेषज्ञता है. वहीं पारंपरिक और दोहराए जाने वाले कामों पर निर्भर भूमिकाओं पर दबाव बढ़ने की संभावना है. इस तरह 2026 की छंटनी सिर्फ कर्मचारियों की संख्या घटने की कहानी नहीं है, बल्कि यह भी दिखाती है कि टेक कंपनियां भविष्य के लिए अपने बिजनेस मॉडल और वर्कफोर्स को किस तरह बदल रही हैं.