Haryana Sir: हरियाणा के जींद जिले के मनोहरपुर गांव में एक भावुक कहानी ने सभी को छू लिया. 55 वर्षीय सीता राम, जो 35 साल पहले परिवार छोड़कर चले गए थे, अचानक अपने बड़े भाई दलबीर से मिल गए. सीता राम पोलियो से पीड़ित थे. परिवार ने उन्हें पंजाब के संगरूर में इलाज के लिए भर्ती कराया था. एक महीने बाद जब परिवार उन्हें लेने गया तो स्टाफ ने बताया कि लड़का गायब हो गया है. परिवार ने सालों तक खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. निराश होकर उन्होंने उम्मीद छोड़ दी.
35 साल बाद बिछड़े भाई से मिला
सीता राम ने बाद में बताया कि उन्होंने सेंटर इसलिए छोड़ दिया था क्योंकि अपनी बीमारी का बोझ परिवार पर नहीं डालना चाहते थे. पंजाब में रहकर उन्होंने एक प्राइवेट स्कूल में चपरासी का काम किया और बाद में पक्की नौकरी पाई. हाल ही में वह वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान दस्तावेज जमा करने के लिए उन्हें स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (SLC) की जरूरत पड़ी. 6 सितंबर को वे मनोहरपुर के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल पहुंचे. असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर रमेश कुमार वहां मौजूद थे. सीता राम ने बताया कि उन्होंने क्लास 10 तक पढ़ाई की थी लेकिन परीक्षा पास नहीं की.
SIR के कारण हुआ मिलाप
रमेश ने बूथ लेवल ऑफिसर कृष्ण कुमार को जानकारी इकट्ठा करने को कहा. कृष्ण उसी गांव के थे. सीता राम ने अपने भाई दलबीर का नाम बताया. संयोग से कृष्ण दलबीर को जानते थे. फोन पर बात होते ही दलबीर ने कहा कि यह उनका बिछड़ा भाई है और तुरंत स्कूल पहुंचे. जब दोनों भाई आमने-सामने हुए तो भावनाएं काबू में नहीं रहीं. वे फूट-फूट कर रो पड़े और गले लग गए. कमरे में मौजूद सभी लोग भावुक हो गए. 35 साल का इंतजार एक पल में खत्म हो गया. यह घटना याद दिलाती है कि कभी-कभी सरकारी प्रक्रियाएं भी जिंदगी के लंबे बिछोह को खत्म कर परिवारों को फिर से जोड़ सकती हैं.
पंजाब में कर रहे थे नौकरी
BLO कृष्ण कुमार ने बताया कि परिवार ने सीता राम को बहुत ढूंढा था. कहीं पता नहीं चला तो सबने मान लिया कि वो मर गए हैं. परिवार ने बताया था कि उनका भाई 35 साल से गायब है. उन्होंने BLO से पूछा था कि क्या सीता राम के पैर में कोई दिक्कत है? BLO ने हां कहा. पता चला कि सीता राम इतने सालों से पंजाब में रह रहे थे. वहां उन्होंने सरकारी नौकरी की थी. उससे पहले एक प्राइवेट स्कूल में चपरासी का काम भी किया था. 35 साल बाद वो अपने गांव मनोहरपुर सिर्फ एक स्कूल सर्टिफिकेट लेने आए थे. उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि इसी बहाने उनका अपने परिवार से मिलना हो जाएगा. स्कूल में मौजूद अधिकारी रमेश कुमार ने कहा कि ये सिर्फ कागजों की जांच नहीं थी, बल्कि इसने 35 साल से बिछड़े एक परिवार को फिर से मिला दिया.
ये भी पढ़ें: Delhi Weather Today: आज फिर बारिश से मचेगी तबाही? जानें आज राजधानी में कैसा रहेगा मौसम; IMD ने जारी किया अलर्ट