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Subhash Chandra: फर्जी नेटवर्थ से कर्ज के विवाद तक, कौन हैं सुभाष चंद्रा, Zee फाउंडर पर कब-कब लगे बड़े और गंभीर आरोप?

Zee के फाउंडर सुभाष चंद्रा एक बार फिर कानूनी और वित्तीय विवादों को लेकर चर्चा में हैं. फर्जी नेटवर्थ बताकर करोड़ों का कर्ज लेने के आरोप से लेकर संपत्ति और कर्ज से जुड़े विवादों तक, जानिए सुभाष चंद्रा पर कब-कब कौन कौन से आरोप लगे, अब तक मामले में क्या-क्या हुआ है.

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Last Updated: 2026-09-05 19:02:18

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ज़ी और एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा इन दिनों अलग-अलग कानूनी और वित्तीय मामलों को लेकर चर्चा में हैं. शनिवार, 5 सितम्बर को CBI ने उनके खिलाफ करीब 1,322 करोड़ रुपये के LIC Housing Finance मामले में FIR दर्ज की है. इससे पहले उनकी व्यक्तिगत इन्सॉल्वेंसी मामले में NCLT की कार्रवाई और SEBI की ओर से लगाए गए प्रतिबंध ने भी उनकी मुश्किलें बढ़ाई हैं.

जानिए कब-कब विवादों में घिरे ज़ी ग्रुप फाउंडर सुभाष चंद्रा…

1,322 करोड़ का एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस मामला

सबसे ताजा मामला LIC हाउसिंग फाइनेंस से जुड़ा है. LIC हाउसिंग फाइनेंस की शिकायत पर CBI ने शनिवार, 5 सितम्बर को ज़ी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा और 3 अन्य के खिलाफ 1,322 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है. आरोप है कि उन्होंने फर्जी नेटवर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर करोड़ों का लोन लिया और बाद में उतनी संपत्ति होने से इनकार कर दिया.

LICHFL ने अपनी शिकायत में कहा कि 2018 में वसंत सागर प्रॉपर्टीज और अन्य कंपनियों के लिए लोन लेते समय सुभाष चंद्रा ने फर्जी नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा करके अपनी कुल संपत्ति लगभग 59,113 करोड़ रुपये बताई थी, लेकिन बाद में इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत दिवालियापन की कार्यवाही के दौरान वे अपने इस दावे से मुकर गए और कहा कि 2017-18 में भी उनकी संपत्ति 40,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं थी और 2024 में यह घटकर केवल 31.79 करोड़ रुपये रह गई है.

22,000 करोड़ से ज्यादा के दावों वाला व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया से जुड़ा मामला

25 अगस्त को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालियापन प्रक्रिया के तहत उनकी 6.5 करोड़ रुपये की रीपेमेंट योजना को मंज़ूरी दी थी. यह मामला इंडियाबुल्स द्वारा विवेक इंफ्राकॉन को दिए गए 170 करोड़ रुपये के क़र्ज़ के लिए चंद्रा द्वारा दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा था, जिसमें उनके ख़िलाफ़ कुल स्वीकृत दावे 22,006.57 करोड़ रुपये के थे. NCLT द्वारा मात्र 6.5 करोड़ रुपये (31.79 करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति के आधार पर) में इस दावे का सेटलमेंट करने का आदेश IBC के इतिहास का सबसे बड़ा हेयरकट (99.97%) बन गया, जिसे 80% से अधिक लेनदारों ने स्वीकार किया था.

इस फ़ायदे के तहत सुभाष चंद्रा कॉरपोरेट डिफ़ॉल्ट से अलग व्यक्तिगत गारंटी के प्रावधान का लाभ उठाकर नाममात्र की रकम चुकाकर बरी हो गए, लेकिन इस फैसले के बाद भारी विवाद खड़ा हो गया. एचडीएफसी बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और यूनियन बैंक जैसे प्रमुख कर्जदाताओं ने इसका कड़ा विरोध किया. उन्होंने सवाल उठाया कि 2017-18 में चंद्रा का नेटवर्थ सर्टिफिकेट 40,000 से 45,000 करोड़ रुपये का था, जो घटकर 31.79 करोड़ रुपये रह गया, और इस अंतर की जांच के लिए फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की. कर्जदाताओं का तर्क था कि यदि प्रमोटर इतनी बड़ी देनदारी से नाममात्र की रकम देकर मुक्त हो जाएंगे, तो बैंकिंग व्यवस्था में ‘पर्सनल गारंटी’ की उपयोगिता ही समाप्त हो जाएगी. बढ़ते विवाद और कानूनी अपीलों के बाद उच्च न्याय मंचों (NCLAT/अदालत) द्वारा इस प्रक्रिया और फैसले के अमल पर रोक लगा दी गई.

ये भी पढ़ें:  Zee ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा की बढ़ीं मुश्किलें! 1,322 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप, CBI ने दर्ज की FIR

SEBI की कार्रवाई और ज़ी की संपत्ति का मामला

सुभाष चंद्रा को जुलाई 2026 में ‘सेबी’ की एक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा. बाजार नियामक ने उन्हें और ज़ी एंटरटेनमेंट के CEO पुनीत गोयनका को एक साल के लिए सिक्योरिटी मार्केट से प्रतिबंधित किया.

मामला ज़ी एंटरटेनमेंट की एक संपत्ति को कथित तौर पर प्रमोटर से जुड़ी इकाइयों के कर्ज के लिए सिक्योरिटी के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से जुड़ा था. SEBI के मुताबिक, इसके लिए जरूरी मंजूरियां और डिस्क्लोजर नहीं किए गए थे.

इस मामले में SEBI ने सुभाष चंद्रा पर 60 लाख, पुनीत गोयनका पर 58 लाख और ज़ी एंटरटेनमेंट पर 30 लाख का जुर्माना लगाया. कंपनी को दो महीने के लिए सिक्योरिटी मार्केट से प्रतिबंधित किया गया, जबकि चंद्रा और गोयनका पर एक साल का प्रतिबंध लगाया गया.

2019 में ZEEL से जुड़ा 200 करोड़ का विवाद

सुभाष चंद्रा से जुड़े पुराने मामलों में ज़ी एंटरटेनमेंट के फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े करीब 200 करोड़ का विवाद भी रहा है. SAT के 2025 के आदेश में दर्ज विवरण के मुताबिक, 2018 में चंद्रा ने Yes Bank को एक लेटर ऑफ कम्फर्ट(एक तरह का आश्वासन/गारंटी पत्र) दिया था, जिसके बाद ZEEL की 200 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट राशि का इस्तेमाल संबंधित कंपनियों की देनदारियों के लिए किया गया. बाद में ZEEL ने इस राशि को लेकर Yes Bank से स्पष्टीकरण मांगा था.

SEBI ने इस मामले में चंद्रा की भूमिका को लेकर नियामकीय कार्रवाई की थी और उन्होंने उसके खिलाफ सेक्यूरिटीज़ अपीलीय ट्रिब्यूनल(SAT) का रुख किया.

कुल मिलाकर, सुभाष चंद्रा से जुड़े विवादों ने उनके लंबे कारोबारी सफर पर कई सवाल खड़े किए हैं. अब सीबीआई मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या रुख लेती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है. फिलहाल, आरोपों और उनके जवाबों के बीच पूरी तस्वीर का साफ होना बाकी है.

शिरपुर गोल्ड रिफाइनरी का मामला

सुभाष चंद्रा से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण विनियामक मामला शिरपुर गोल्ड रिफाइनरी Ltd का है. अप्रैल 2023 में SEBI ने कंपनी, उसके प्रमोटर जयनीर इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स और कई अन्य व्यक्तियों के खिलाफ अंतरिम आदेश-सह-कारण बताओ नोटिस जारी किया. SEBI की जांच में आरोप सामने आया कि कंपनी के फंड्स को कनेक्टेड एंटिटीज के थ्रूज प्रमोटर फैमिली से जुड़ी एंटिटीज की ओर डायवर्ट किया गया. रेगुलेटर ने कहा कि कंपनी के लगभग 100 परसेंट डेटर्स कनेक्टेड एंटिटीज से जुड़े पाए गए और ट्रांजैक्शन्स में लेयर्ड स्ट्रक्चर्स का इस्तेमाल दिखाई दिया.

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Last Updated: 2026-09-05 19:02:18

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ज़ी और एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा इन दिनों अलग-अलग कानूनी और वित्तीय मामलों को लेकर चर्चा में हैं. शनिवार, 5 सितम्बर को CBI ने उनके खिलाफ करीब 1,322 करोड़ रुपये के LIC Housing Finance मामले में FIR दर्ज की है. इससे पहले उनकी व्यक्तिगत इन्सॉल्वेंसी मामले में NCLT की कार्रवाई और SEBI की ओर से लगाए गए प्रतिबंध ने भी उनकी मुश्किलें बढ़ाई हैं.

जानिए कब-कब विवादों में घिरे ज़ी ग्रुप फाउंडर सुभाष चंद्रा…

1,322 करोड़ का एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस मामला

सबसे ताजा मामला LIC हाउसिंग फाइनेंस से जुड़ा है. LIC हाउसिंग फाइनेंस की शिकायत पर CBI ने शनिवार, 5 सितम्बर को ज़ी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा और 3 अन्य के खिलाफ 1,322 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है. आरोप है कि उन्होंने फर्जी नेटवर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर करोड़ों का लोन लिया और बाद में उतनी संपत्ति होने से इनकार कर दिया.

LICHFL ने अपनी शिकायत में कहा कि 2018 में वसंत सागर प्रॉपर्टीज और अन्य कंपनियों के लिए लोन लेते समय सुभाष चंद्रा ने फर्जी नेटवर्थ सर्टिफिकेट जमा करके अपनी कुल संपत्ति लगभग 59,113 करोड़ रुपये बताई थी, लेकिन बाद में इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत दिवालियापन की कार्यवाही के दौरान वे अपने इस दावे से मुकर गए और कहा कि 2017-18 में भी उनकी संपत्ति 40,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं थी और 2024 में यह घटकर केवल 31.79 करोड़ रुपये रह गई है.

22,000 करोड़ से ज्यादा के दावों वाला व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया से जुड़ा मामला

25 अगस्त को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालियापन प्रक्रिया के तहत उनकी 6.5 करोड़ रुपये की रीपेमेंट योजना को मंज़ूरी दी थी. यह मामला इंडियाबुल्स द्वारा विवेक इंफ्राकॉन को दिए गए 170 करोड़ रुपये के क़र्ज़ के लिए चंद्रा द्वारा दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा था, जिसमें उनके ख़िलाफ़ कुल स्वीकृत दावे 22,006.57 करोड़ रुपये के थे. NCLT द्वारा मात्र 6.5 करोड़ रुपये (31.79 करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति के आधार पर) में इस दावे का सेटलमेंट करने का आदेश IBC के इतिहास का सबसे बड़ा हेयरकट (99.97%) बन गया, जिसे 80% से अधिक लेनदारों ने स्वीकार किया था.

इस फ़ायदे के तहत सुभाष चंद्रा कॉरपोरेट डिफ़ॉल्ट से अलग व्यक्तिगत गारंटी के प्रावधान का लाभ उठाकर नाममात्र की रकम चुकाकर बरी हो गए, लेकिन इस फैसले के बाद भारी विवाद खड़ा हो गया. एचडीएफसी बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और यूनियन बैंक जैसे प्रमुख कर्जदाताओं ने इसका कड़ा विरोध किया. उन्होंने सवाल उठाया कि 2017-18 में चंद्रा का नेटवर्थ सर्टिफिकेट 40,000 से 45,000 करोड़ रुपये का था, जो घटकर 31.79 करोड़ रुपये रह गया, और इस अंतर की जांच के लिए फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की. कर्जदाताओं का तर्क था कि यदि प्रमोटर इतनी बड़ी देनदारी से नाममात्र की रकम देकर मुक्त हो जाएंगे, तो बैंकिंग व्यवस्था में ‘पर्सनल गारंटी’ की उपयोगिता ही समाप्त हो जाएगी. बढ़ते विवाद और कानूनी अपीलों के बाद उच्च न्याय मंचों (NCLAT/अदालत) द्वारा इस प्रक्रिया और फैसले के अमल पर रोक लगा दी गई.

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SEBI की कार्रवाई और ज़ी की संपत्ति का मामला

सुभाष चंद्रा को जुलाई 2026 में ‘सेबी’ की एक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा. बाजार नियामक ने उन्हें और ज़ी एंटरटेनमेंट के CEO पुनीत गोयनका को एक साल के लिए सिक्योरिटी मार्केट से प्रतिबंधित किया.

मामला ज़ी एंटरटेनमेंट की एक संपत्ति को कथित तौर पर प्रमोटर से जुड़ी इकाइयों के कर्ज के लिए सिक्योरिटी के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से जुड़ा था. SEBI के मुताबिक, इसके लिए जरूरी मंजूरियां और डिस्क्लोजर नहीं किए गए थे.

इस मामले में SEBI ने सुभाष चंद्रा पर 60 लाख, पुनीत गोयनका पर 58 लाख और ज़ी एंटरटेनमेंट पर 30 लाख का जुर्माना लगाया. कंपनी को दो महीने के लिए सिक्योरिटी मार्केट से प्रतिबंधित किया गया, जबकि चंद्रा और गोयनका पर एक साल का प्रतिबंध लगाया गया.

2019 में ZEEL से जुड़ा 200 करोड़ का विवाद

सुभाष चंद्रा से जुड़े पुराने मामलों में ज़ी एंटरटेनमेंट के फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े करीब 200 करोड़ का विवाद भी रहा है. SAT के 2025 के आदेश में दर्ज विवरण के मुताबिक, 2018 में चंद्रा ने Yes Bank को एक लेटर ऑफ कम्फर्ट(एक तरह का आश्वासन/गारंटी पत्र) दिया था, जिसके बाद ZEEL की 200 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट राशि का इस्तेमाल संबंधित कंपनियों की देनदारियों के लिए किया गया. बाद में ZEEL ने इस राशि को लेकर Yes Bank से स्पष्टीकरण मांगा था.

SEBI ने इस मामले में चंद्रा की भूमिका को लेकर नियामकीय कार्रवाई की थी और उन्होंने उसके खिलाफ सेक्यूरिटीज़ अपीलीय ट्रिब्यूनल(SAT) का रुख किया.

कुल मिलाकर, सुभाष चंद्रा से जुड़े विवादों ने उनके लंबे कारोबारी सफर पर कई सवाल खड़े किए हैं. अब सीबीआई मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या रुख लेती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है. फिलहाल, आरोपों और उनके जवाबों के बीच पूरी तस्वीर का साफ होना बाकी है.

शिरपुर गोल्ड रिफाइनरी का मामला

सुभाष चंद्रा से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण विनियामक मामला शिरपुर गोल्ड रिफाइनरी Ltd का है. अप्रैल 2023 में SEBI ने कंपनी, उसके प्रमोटर जयनीर इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स और कई अन्य व्यक्तियों के खिलाफ अंतरिम आदेश-सह-कारण बताओ नोटिस जारी किया. SEBI की जांच में आरोप सामने आया कि कंपनी के फंड्स को कनेक्टेड एंटिटीज के थ्रूज प्रमोटर फैमिली से जुड़ी एंटिटीज की ओर डायवर्ट किया गया. रेगुलेटर ने कहा कि कंपनी के लगभग 100 परसेंट डेटर्स कनेक्टेड एंटिटीज से जुड़े पाए गए और ट्रांजैक्शन्स में लेयर्ड स्ट्रक्चर्स का इस्तेमाल दिखाई दिया.

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