KBC 18 Pooja Das Stoy: 15 की उम्र में मां छूटी, 17 में पिता… आंसुओं को ढाल बना 12वीं पास पूजा ने KBC के मंच पर रचा इतिहास!
जिंदगी जब कदम-कदम पर इम्तिहान ले रही हो, तब थम जाना या किस्मत को कोसना बहुत आसान होता है. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो हर मुश्किल को अपनी ढाल बनाकर खामोशी से अपनी किस्मत खुद लिखते हैं. उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के मंच तक पहुंचीं पूजा दास की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.
एक साधारण सी गृहणी, जिसकी जिंदगी में दुखों का पहाड़ टूटा, लेकिन आंखों में कुछ कर गुजरने की चमक कभी धुंधली नहीं पड़ी. जब वह टीवी के सबसे बड़े मंच पर हॉटसीट पर बैठीं, तो उनकी सादगी, बेबाक अंदाज और जबरदस्त आत्मविश्वास देखकर खुद अमिताभ बच्चन भी अपनी जगह ठिठक गए. आखिर कौन हैं पूजा दास, और कैसे एक आम से गांव की इस बहू ने केबीसी के मंच पर हर किसी को मुरीद बना लिया? आइए जानते हैं इस प्रेरणादायक सफर की पूरी कहानी.
KBC 18 के मंच पर रचा इतिहास
आमतौर पर माना जाता है कि 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC) जैसे बड़े मंच पर आगे बढ़ने के लिए ऊंची डिग्री या बड़ी पढ़ाई की जरूरत होती है. लेकिन उत्तर प्रदेश के वासलीपुर ग्रांट गांव की रहने वाली पूजा दास ने KBC सीजन 18 के 2 सितंबर के एपिसोड में इस बात को पूरी तरह गलत साबित कर दिया. एक साधारण गृहणी, जिन्होंने सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई की है, उन्होंने अपनी समझदारी और सामान्य ज्ञान के दम पर 12.5 लाख रुपये की बड़ी रकम अपने नाम की.
संघर्षों से भरा शुरुआती जीवन
पूजा दास की यह कामयाबी उन लाखों युवाओं और महिलाओं के लिए एक मिसाल है जो संसाधनों या बड़ी डिग्री की कमी की वजह से खुद को कमजोर समझ लेते हैं. कम उम्र में माता-पिता को खोने और 21 साल में शादी हो जाने के बाद भी पूजा ने सीखने और आगे बढ़ने की अपनी ललक को कभी कम नहीं होने दिया. जब वह 15 साल की थीं तो उनकी मां का साया सिर से उठ गया और 17 की उम्र में पिता भी गुजर गए. इसके बाद उन पर पढ़ाई छोड़कर शादी करने का सामाजिक दबाव बनने लगा.
शादी के बाद बदला फैसला
शादी के बाद अक्सर महिलाओं की पढ़ाई छूट जाती है, लेकिन पूजा के ससुराल वालों—खासकर उनकी सास—ने उन्हें आगे पढ़ने के लिए हिम्मत दी. पूजा ने पहले आर्ट्स स्ट्रीम से 12वीं की थी, लेकिन शादी के बाद उन्होंने साइंस स्ट्रीम चुनकर दोबारा 12वीं बोर्ड की परीक्षा पास की. हॉटसीट पर पूजा ने अमिताभ बच्चन से बहुत ही आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी में बात की. उन्होंने बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई इंग्लिश मीडियम स्कूल में हुई थी. जिस गांव में आज भी महिलाएं पर्दे में रहती हैं, वहां उन्होंने सोशल मीडिया पर अंग्रेजी भाषा चुनी ताकि वह बिना किसी तानों के अपनी बात कह सकें.
सेल्फ स्टडी और कंटेंट क्रिएशन
बिना किसी कोचिंग या कॉलेज की डिग्री के 25 लाख रुपये के सवाल तक पहुंचना बहुत बड़ी बात है. पूजा ने साबित किया कि सही तरीके से मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करके घर बैठे भी ज्ञान हासिल किया जा सकता है. घर के कामकाज संभालने और अपनी दो साल की बेटी की देखभाल के साथ-साथ पूजा किताबें पढ़कर अपनी नॉलेज बढ़ाती रहीं. दो साल पहले उन्होंने अपनी सास के साथ रेसिपी वीडियो बनाकर शुरुआत की थी, और अब वह महिला सशक्तिकरण व शिक्षा पर भी वीडियो बनाती हैं.
25 लाख रुपये का सवाल
खेल के आखिरी पड़ाव तक पहुंचते-पहुंचते पूजा की सभी लाइफलाइन खत्म हो चुकी थीं. 25 लाख रुपये के लिए उनसे दक्षिण कोरिया में मौजूद 'संयुक्त राष्ट्र मेमोरियल कब्रिस्तान' (UN Memorial Cemetery) से जुड़ा इतिहास का एक कठिन सवाल पूछा गया. रिस्क न लेते हुए पूजा ने समझदारी दिखाई और 12.5 लाख रुपये लेकर गेम से क्विट कर लिया. पूजा दास की कहानी सिखाती है कि किसी बड़ी डिग्री से ज्यादा इंसान की 'सीखने की इच्छा' मायने रखती है.