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150 साल पुरानी मस्जिद पर तड़के 4 बजे क्यों चला बुलडोजर? जानिए सहारनपुर कलेक्ट्रेट विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी

Saharanpur Mosque Demolition: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद पर शनिवार तड़के कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने 6 बुलडोजर चलाकर बेदखली की कार्रवाई की. मार्च 2025 से चल रहे इस कानूनी विवाद, जिला कोर्ट के फैसले और मौके पर बने तनावपूर्ण माहौल की पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

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Last Updated: 2026-09-05 12:48:48

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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी एक मस्जिद को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद शनिवार सुबह अचानक बढ़ गया. कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार तड़के मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी. मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ कई बुलडोजर के जरिए कार्रवाई की गई.

देर रात फैली अफवाह, सुबह शुरू हुआ एक्शन

शुक्रवार देर रात से ही सोशल मीडिया और शहर में यह चर्चा फैल गई थी कि कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद पर कार्रवाई हो सकती है. रात गहराते ही कलेक्ट्रेट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई. शनिवार सुबह करीब 4:00 बजे परिसर के अंदर बुलडोजर पहुंचे और निर्माण को ढहाने का काम शुरू हुआ. कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट के सभी मुख्य रास्तों और गेटों को बंद कर दिया गया था.

क्या है कानूनी मामला?

यह पूरा विवाद करीब डेढ़ साल पुराना है:

  • बजरंग दल से जुड़े विकास त्यागी की शिकायत पर 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में मामला दर्ज किया गया था.
  • 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए 30 दिनों के भीतर जगह खाली करने का आदेश दिया था. साथ ही जुर्माना भी लगाया था.
  • मस्जिद पक्ष ने इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी. 2 सितंबर 2026 को जिला जज सतेंद्र कुमार की कोर्ट ने मस्जिद पक्ष की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को सही ठहराया और जमीन को सरकारी माना.

अदालत में क्या दिए गए तर्क?

सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की ओर से दावा किया गया था कि यह जमीन वक्फ की है और मस्जिद लगभग 150 साल पुरानी है. हालांकि, कोर्ट में इस बात के ठोस दस्तावेज या सबूत पेश नहीं किए जा सके, जिसके आधार पर अदालत ने जमीन को सरकारी घोषित कर दिया.

रातभर बना रहा गहमागहमी का माहौल

  • कार्रवाई की भनक मिलते ही देर रात स्थानीय नेताओं और मुस्लिम समाज के लोगों में हलचल तेज हो गई.
  • कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया के जरिए स्थिति की जानकारी दी.
  • सपा विधायक आशु मलिक और एमएलसी शाहनवाज खान सहित कई नेता कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें बाहर ही रोक दिया.
  • स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए जिले में अतिरिक्त पुलिस बल के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की गई.

प्रशासन की सख्त नजर

शनिवार सुबह से ही कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे ताकि कानून-व्यवस्था न बिगड़े. किसी भी तरह की भीड़ को कलेक्ट्रेट के पास इकट्ठा नहीं होने दिया गया. वहीं, मस्जिद पक्ष के लोग अब इस मामले में आगे के कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.

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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी एक मस्जिद को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद शनिवार सुबह अचानक बढ़ गया. कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार तड़के मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी. मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ कई बुलडोजर के जरिए कार्रवाई की गई.

देर रात फैली अफवाह, सुबह शुरू हुआ एक्शन

शुक्रवार देर रात से ही सोशल मीडिया और शहर में यह चर्चा फैल गई थी कि कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद पर कार्रवाई हो सकती है. रात गहराते ही कलेक्ट्रेट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई. शनिवार सुबह करीब 4:00 बजे परिसर के अंदर बुलडोजर पहुंचे और निर्माण को ढहाने का काम शुरू हुआ. कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट के सभी मुख्य रास्तों और गेटों को बंद कर दिया गया था.

क्या है कानूनी मामला?

यह पूरा विवाद करीब डेढ़ साल पुराना है:

  • बजरंग दल से जुड़े विकास त्यागी की शिकायत पर 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में मामला दर्ज किया गया था.
  • 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए 30 दिनों के भीतर जगह खाली करने का आदेश दिया था. साथ ही जुर्माना भी लगाया था.
  • मस्जिद पक्ष ने इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी. 2 सितंबर 2026 को जिला जज सतेंद्र कुमार की कोर्ट ने मस्जिद पक्ष की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को सही ठहराया और जमीन को सरकारी माना.

अदालत में क्या दिए गए तर्क?

सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की ओर से दावा किया गया था कि यह जमीन वक्फ की है और मस्जिद लगभग 150 साल पुरानी है. हालांकि, कोर्ट में इस बात के ठोस दस्तावेज या सबूत पेश नहीं किए जा सके, जिसके आधार पर अदालत ने जमीन को सरकारी घोषित कर दिया.

रातभर बना रहा गहमागहमी का माहौल

  • कार्रवाई की भनक मिलते ही देर रात स्थानीय नेताओं और मुस्लिम समाज के लोगों में हलचल तेज हो गई.
  • कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया के जरिए स्थिति की जानकारी दी.
  • सपा विधायक आशु मलिक और एमएलसी शाहनवाज खान सहित कई नेता कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें बाहर ही रोक दिया.
  • स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए जिले में अतिरिक्त पुलिस बल के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की गई.

प्रशासन की सख्त नजर

शनिवार सुबह से ही कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे ताकि कानून-व्यवस्था न बिगड़े. किसी भी तरह की भीड़ को कलेक्ट्रेट के पास इकट्ठा नहीं होने दिया गया. वहीं, मस्जिद पक्ष के लोग अब इस मामले में आगे के कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.

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