Aja Ekadashi 2026 Vrat Katha: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को खास जगह दी गई है. इस साल अजा एकादशी का पवित्र व्रत सोमवार, 7 सितंबर 2026 को रखा जाएगा. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत रखने से साधक को अश्वमेध यज्ञ का पुण्य मिलता है और पिछले जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, जिससे मोक्ष का रास्ता बनता है. ऐसी पक्की धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को रखने से व्यक्ति को अपना खोया हुआ वैभव, पद, पैसा, प्रतिष्ठा और पारिवारिक सुख-शांति वापस मिलती है.
अजा एकादशी मुहूर्त और तिथि समय
- एकादशी तिथि शुरू: रविवार, 6 सितंबर, 2026 शाम 7:30 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: सोमवार, 7 सितंबर, 2026 शाम 5:05 बजे
- व्रत का दिन: उदय तिथि के शास्त्रों के नियमों के अनुसार, अजा एकादशी का मुख्य व्रत सोमवार, 7 सितंबर, 2026 को रखा जाएगा.
राजा हरिश्चंद्र की पौराणिक कहानी
अजा एकादशी की महानता के पीछे सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की प्रेरक कहानी है. दरअसल, एक बार सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र को दुर्भाग्य से राजगद्दी छोड़कर वनवास जाना पड़ा था. ऋषि विश्वामित्र को दक्षिणा देने के लिए, उन्हें अपनी पत्नी (रानी तारामती) और बेटे को बेचना पड़ा और खुद श्मशान में काम करना पड़ा. इस बहुत मुश्किल समय में एक ऋषि की सलाह पर राजा हरिश्चंद्र ने बड़ी श्रद्धा से अजा एकादशी का व्रत किया. इस व्रत के पुण्य से राजा हरिश्चंद्र को अपना खोया हुआ राज्य, पत्नी और बेटा वापस मिल गया. पद्म पुराण के अनुसार, यह व्रत सभी पापों को नष्ट करता है और मोक्ष की ओर ले जाता है.
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अजा एकादशी की पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें, भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत रखने का संकल्प लें.
- चौक पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या फोटो स्थापित करें. गंगाजल से अभिषेक करें.
- भगवान विष्णु को धूप, दीप, तुलसी के पत्ते, तिल और ताजे फूल चढ़ाएं.
- पूजा के दौरान 108 बार ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करें.
- अजा एकादशी के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना और रात में जागकर हरि भजन गाना बहुत फलदायी माना जाता है.
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